Donald Trump News: ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जल्द खत्म कर सकते हैं ट्रंप, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर लिया बड़ा फैसला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान ‘Operation Epic Fury’ को खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन 6 अप्रैल 2026 तक इस युद्ध को समाप्त करने का लक्ष्य रख रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप अब इस अभियान को और लंबा नहीं खींचना चाहते, भले ही दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पूरी तरह से न खुले। अमेरिका का मुख्य ध्यान अब ईरान की नौसेना और उसकी मिसाइल ताकत को कम करने पर है।
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अमेरिकी सेना का अभियान क्यों खत्म करना चाहते हैं ट्रंप?
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के अनुसार, अमेरिका का यह सैन्य अभियान अब तक काफी सफल रहा है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अमेरिकी सेना ने अब तक ईरान के 11,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि सैन्य लक्ष्यों को पूरा करने के बाद अब कूटनीतिक बातचीत के जरिए आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि, ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर समझौता होने के बाद भी ईरान ने समुद्री रास्ता नहीं खोला, तो उसके ऊर्जा ठिकानों पर दोबारा हमले किए जा सकते हैं। इस फैसले के पीछे का मुख्य कारण युद्ध को तय समय सीमा के भीतर रखना है।
इस तनावपूर्ण स्थिति से जुड़ी मुख्य जानकारी क्या है?
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस विवाद में कई बड़ी घटनाएं सामने आई हैं, जो वैश्विक व्यापार और सुरक्षा पर सीधा असर डाल रही हैं। नीचे दी गई जानकारी इस पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट करती है:
| तारीख | महत्वपूर्ण घटना |
|---|---|
| 28 फरवरी 2026 | अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ‘Operation Epic Fury’ शुरू किया। |
| 27 मार्च 2026 | ईरान की IRGC ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद करने का ऐलान किया। |
| 31 मार्च 2026 | दुबई के पास कुवैती तेल टैंकर ‘अल-साल्मी’ पर ड्रोन हमला हुआ। |
| 31 मार्च 2026 | ट्रंप ने बातचीत में अच्छी प्रगति होने की बात कही। |
| 6 अप्रैल 2026 | ट्रंप द्वारा समझौते के लिए तय की गई आखिरी समय सीमा। |
इस बीच, पेंटागन अब ईरान के कुछ द्वीपों पर कब्जा करने और छोटे स्तर पर जमीनी कार्रवाई की योजना भी बना रहा है। दूसरी ओर, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी समेत 20 से ज्यादा देशों ने ईरान द्वारा समुद्री रास्ता बंद करने की कड़ी आलोचना की है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां से होने वाले तेल के व्यापार पर इस स्थिति का गहरा असर देखा जा रहा है।




