Middle East में तनाव से बढ़ेगी गरीबी, UNDP ने अरब देशों की जीडीपी 6% तक गिरने की चेतावनी दी
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में जारी संघर्ष की वजह से अरब देशों में पिछले कई सालों में हुए विकास के काम बर्बाद हो सकते हैं। इससे लाखों लोगों के गरीबी के दलदल में फंसने का खतरा पैदा हो गया है। इस असेसमेंट में बताया गया है कि आने वाले समय में हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
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अरब देशों की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
UNDP की रिपोर्ट में बताया गया है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ती सैन्य गतिविधियों का असर सीधे वहां की जीडीपी (GDP) पर पड़ेगा। एक्सपर्ट्स ने अनुमान लगाया है कि अरब क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में 3.7 प्रतिशत से लेकर 6 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट देखी जा सकती है। यह आर्थिक नुकसान इतना बड़ा है कि इससे वहां के विकास कार्यों की रफ्तार थम जाएगी। खाड़ी और आसपास के देशों में व्यापार और नौकरियों पर भी इसका बुरा असर पड़ना तय माना जा रहा है।
रिपोर्ट की मुख्य बातें और खतरे
इस असेसमेंट में उन खास बिंदुओं पर ध्यान दिया गया है जो आम जनता की जिंदगी को प्रभावित करेंगे। UNDP ने अपनी मंगलवार को जारी रिपोर्ट में इन खतरों को विस्तार से समझाया है:
- मौजूदा संघर्ष की वजह से लाखों लोग दोबारा गरीबी की चपेट में आ सकते हैं।
- अरब देशों की जीडीपी में 6 प्रतिशत तक की कमी आने की संभावना है।
- क्षेत्र में अब तक हुए विकास के फायदों पर पानी फिर सकता है।
- आर्थिक अस्थिरता की वजह से आम आदमी की जेब पर सीधा बोझ बढ़ेगा।
- सैन्य तनाव की वजह से निवेश और व्यापारिक गतिविधियों में कमी आएगी।
इस स्थिति का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो अरब देशों में काम कर रहे हैं या वहां से अपना व्यापार चलाते हैं। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो विकास का पहिया कई साल पीछे चला जाएगा।




