UN की बड़ी चेतावनी: मिडिल ईस्ट में तनाव से 194 अरब डॉलर का हो सकता है नुकसान, नौकरियों पर भी खतरा
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने एक रिपोर्ट जारी कर मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के आर्थिक नुकसान को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों की वजह से अरब देशों को 194 अरब डॉलर से लेकर 260 अरब डॉलर तक का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। यह रिपोर्ट 31 मार्च 2026 को जारी की गई है, जिसमें बताया गया है कि व्यापार, ऊर्जा बाजार और शिपिंग रूट में आने वाली रुकावटें इस नुकसान की मुख्य वजह बनेंगी।
आर्थिक नुकसान का किन क्षेत्रों पर होगा सबसे ज्यादा असर?
UNDP की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सैन्य तनाव की वजह से मिडिल ईस्ट की GDP में 3.7% से 6% तक की गिरावट आ सकती है। खासतौर पर स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में रुकावट आने से तेल और गैस की सप्लाई पर गहरा असर पड़ेगा। निवेश के मामले में भी भारी कमी आने की आशंका जताई गई है क्योंकि अनिश्चितता के माहौल में निवेशक पीछे हट सकते हैं। अरब देशों के ब्यूरो प्रमुख ने कहा है कि यह स्थिति खतरे की घंटी है और इसका असर लंबे समय तक बना रहेगा।
आम जनता और रोजगार पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस आर्थिक मंदी का सीधा असर आम लोगों की आजीविका पर पड़ने वाला है। रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में बेरोजगारी और गरीबी का संकट गहरा सकता है। महत्वपूर्ण जानकारी नीचे दी गई टेबल में देख सकते हैं:
| प्रभाव का क्षेत्र | अनुमानित आंकड़े |
|---|---|
| बेरोजगारी दर में वृद्धि | 4 प्रतिशत तक बढ़ सकती है |
| नौकरियों का नुकसान | लगभग 36 लाख नौकरियां जा सकती हैं |
| गरीबी का प्रभाव | 40 लाख लोग गरीबी में जा सकते हैं |
| क्षेत्रीय GDP नुकसान | 120 से 194 अरब डॉलर (2015 के मूल्य पर) |
खाड़ी देशों (GCC) और लेवंत क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों और स्थानीय नागरिकों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि व्यापार प्रभावित होने से खाने-पीने की चीजों और फर्टिलाइजर की कीमतों में इजाफा हो सकता है। यह रिपोर्ट बताती है कि अगर सैन्य तनाव थोड़े समय के लिए भी रहता है, तो भी इसके सामाजिक और आर्थिक परिणाम बहुत बड़े होंगे।




