Iran US Tension: ईरान ने अमेरिका के 15 शांति प्रस्तावों को ठुकराया, कहा- शर्तें मानना मुमकिन नहीं
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने साफ़ कर दिया है कि उनकी सरकार ने अमेरिका की तरफ से मिले 15 प्रस्तावों पर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका की शर्तें पूरी तरह से अतार्किक हैं और उन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे क्षेत्र की सुरक्षा और शांति पर सीधा असर पड़ता है। तेहरान ने अपनी संप्रभुता के मुद्दे पर किसी भी तरह के समझौते से इनकार कर दिया है।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या है ताज़ा विवाद?
ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से कुछ प्रस्ताव भेजे थे। इन प्रस्तावों में युद्ध रोकने और परमाणु कार्यक्रम पर पाबंदी लगाने जैसी बातें शामिल थीं। ईरान ने इन शर्तों को अनुचित बताते हुए कहा है कि वह किसी भी दबाव में आकर फैसला नहीं लेगा। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का दावा है कि युद्ध का कठिन दौर बीत चुका है और बातचीत में प्रगति हो रही है। ईरान ने अपनी ओर से स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी शर्तें नहीं मानी जातीं तब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया जाएगा।
प्रस्तावों की मुख्य शर्तें और दोनों पक्षों की मांगें
| विषय | अमेरिका का प्रस्ताव (15 बिंदु) | ईरान की जवाबी शर्तें (5 बिंदु) |
|---|---|---|
| सीजफायर | एक महीने का युद्धविराम | आक्रामकता और हत्याओं का पूरी तरह अंत |
| परमाणु कार्यक्रम | यूरेनियम भंडार सौंपना और संवर्धन रोकना | ईरान की संप्रभुता का सम्मान |
| आर्थिक मुद्दा | प्रतिबंधों पर चर्चा | नुकसान की भरपाई और हर्जाना |
| सुरक्षा | मिसाइल कार्यक्रम पर रोक | Hormuz जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण |
क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की स्थिति
चीन और पाकिस्तान ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए एक अलग शांति योजना पेश की है। इस योजना में जहाजों की सुरक्षा और Strait of Hormuz से सुरक्षित मार्ग की वकालत की गई है। ईरान के Revolutionary Guards ने चेतावनी दी है कि अगर उनके नेताओं को निशाना बनाया गया तो वे अमेरिकी तकनीकी कंपनियों को निशाना बनाएंगे। खाड़ी में काम करने वाले प्रवासियों के लिए इन हालातों पर नज़र रखना ज़रूरी है क्योंकि तनाव बढ़ने से यात्रा और तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं और सीधे संवाद की कोई स्थिति नहीं दिख रही है।




