ट्रंप का बड़ा बयान, 2 से 3 हफ्तों में ईरान पर हमले रोकेगा अमेरिका, किसी समझौते की ज़रूरत नहीं
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका अगले 2 से 3 हफ्तों के भीतर ईरान पर अपने सैन्य हमले खत्म कर सकता है। ट्रंप ने साफ किया है कि इसके लिए उन्हें ईरान के साथ किसी समझौते की जरूरत नहीं है और वे बहुत जल्द वहां से अपनी सेना निकाल लेंगे। ट्रंप के अनुसार अमेरिका का मुख्य मकसद ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था और यह काम अब पूरा हो चुका है। इस फैसले का असर जल्द ही जमीनी स्तर पर दिखने की उम्मीद है।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और अमेरिकी सेना की वापसी की क्या है तैयारी?
डोनाल्ड ट्रंप ने 31 मार्च और 1 अप्रैल 2026 को ताजा अपडेट देते हुए कहा कि अमेरिका Operation Epic Fury को खत्म करने के करीब है। जब उनसे पूछा गया कि क्या इसके लिए कोई डील जरूरी है, तो उन्होंने स्पष्ट मना कर दिया। अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने भी संकेत दिए हैं कि आने वाले दिन इस संघर्ष में निर्णायक साबित होंगे। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio का मानना है कि अब युद्ध की फिनिश लाइन दिखाई दे रही है। अमेरिका और ईरान के बीच इस समय संदेशों का आदान-प्रदान भी हो रहा है ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
खाड़ी देशों पर क्या असर पड़ा और अब तक कितना नुकसान हुआ?
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस संघर्ष का सीधा असर खाड़ी देशों पर भी देखा गया है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में दुबई, कुवैत और कतर जैसे इलाकों को निशाना बनाया है। Strait of Hormuz बंद होने की वजह से वैश्विक तेल की सप्लाई में काफी दिक्कतें आ रही हैं। स्पेन और इटली जैसे देशों ने अमेरिकी सैन्य उड़ानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र और बेस का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। संघर्ष के दौरान हुए नुकसान का विवरण नीचे दिया गया है:
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| ईरान में हताहतों की संख्या | 555 लोग |
| अमेरिकी सैनिकों की मौत | 4 जवान |
| इजरायली नागरिकों की मौत | 9 लोग |
| हमले का मुख्य स्थान | इस्फ़हान में गोला-बारूद डिपो |
| प्रमुख नेता शामिल | अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य शीर्ष अधिकारी |
ट्रंप ने यह भी सुझाव दिया है कि फ्रांस और चीन जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं, उन्हें अब अपनी सुरक्षा का इंतजाम खुद करना चाहिए। अमेरिकी सेना ने हाल ही में ईरान के इस्फ़हान शहर में एक बड़े गोला-बारूद डिपो पर भी हमला किया था। इस तनाव के चलते खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और व्यापार पर भी गहरा असर पड़ा है।




