Russia-Iran Relations: ईरान ने रूस को बिचौलिया बनने का दिया न्योता, अमेरिका और इजरायल के साथ सुलह की कोशिश
ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को कम करने के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह रूस को मध्यस्थ (बिचौलिया) के रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार है। मॉस्को में ईरान के राजदूत Kazem Jalali ने बताया कि उनका देश अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए रूस की भूमिका का स्वागत करता है। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष काफी बढ़ गया है और ईरान की तरफ से इजरायल पर हाल ही में कई मिसाइलें भी दागी गई हैं।
ℹ: ईरान ने इजराइल पर दागीं 100 से ज्यादा मिसाइलें, तेल अवीव में मची अफरा-तफरी, 100 से अधिक लोग घायल।
ईरान ने शांति बहाली के लिए कौन सी 4 शर्तें रखी हैं?
ईरान के राजदूत Kazem Jalali ने साफ किया है कि मध्य पूर्व में शांति तभी संभव है जब उनकी चार प्रमुख मांगों को पूरा किया जाए। ईरान ने इन शर्तों के आधार पर ही किसी भी समझौते की बात कही है:
- ईरान के खिलाफ होने वाली हर तरह की आक्रामकता और आतंकवादी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगे।
- भविष्य में इस तरह के हमले दोबारा नहीं होंगे, इसकी ठोस और भरोसेमंद गारंटी दी जाए।
- ईरान को हुए आर्थिक और नैतिक नुकसान का पूरा मुआवजा दिया जाए।
- Strait of Hormuz में ईरान के कानूनी अधिकारों का सम्मान किया जाए ताकि समुद्री सुरक्षा बनी रहे।
अमेरिका और ईरान के बीच अभी बातचीत की क्या स्थिति है?
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच संपर्क की खबरें भी तेज हुई हैं। हालांकि ईरान अभी किसी भी नतीजे को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। इस संबंध में कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
| अधिकारी का नाम | विवरण |
|---|---|
| Abbas Araghchi (ईरानी विदेश मंत्री) | उन्होंने अमेरिकी दूत Steve Witkoff के साथ संपर्क की बात मानी है, लेकिन इसे वार्ता मानने से इनकार किया है। |
| Donald Trump (अमेरिकी राष्ट्रपति) | उनका दावा है कि ईरान ने युद्धविराम की मांग की है, जिसे Strait of Hormuz खुलने पर सोचा जा सकता है। |
| JD Vance (अमेरिकी उपराष्ट्रपति) | वे लगातार बिचौलियों के माध्यम से संपर्क बनाए हुए हैं ताकि अमेरिका की मांगें मनवाई जा सकें। |
पिछले 24 घंटों में तनाव और बढ़ा है क्योंकि कतर की एक कंपनी के तेल टैंकर पर ईरानी मिसाइल गिरने की खबर आई थी। इसके साथ ही ईरान ने इजरायल पर लगभग 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। GCC देशों ने भी रूस और जॉर्डन के साथ मिलकर इन हमलों के असर पर चर्चा की है।




