लेबनान में 3 इंडोनेशियाई शांति रक्षकों की मौत पर UN की जांच में लगेगा समय, इंडोनेशिया ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
लेबनान में संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति मिशन पर तैनात तीन इंडोनेशियाई सैनिकों की मौत के मामले में जांच प्रक्रिया शुरू हो गई है। UN प्रवक्ता के मुताबिक, इस घटना की पूरी सच्चाई सामने आने में अभी कुछ समय लग सकता है। यह मामला मार्च के आखिरी दिनों में हुई झड़पों और विस्फोटों से जुड़ा है, जिसमें शांति रक्षकों को निशाना बनाया गया था। इंडोनेशिया ने इस घटना पर कड़ा विरोध जताया है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया है।
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सैनिकों की मौत कैसे हुई और हमले में कौन-कौन शामिल थे?
लेबनान के दक्षिणी हिस्से में अलग-अलग दिनों में हुए हमलों में शांति रक्षकों की जान गई। UNIFIL के शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये हमले सड़क किनारे हुए विस्फोटों और अज्ञात गोला-बारूद के फटने की वजह से हुए।
- फरीज़ल रोमाधोन: 29 मार्च को एक प्रोजेक्टाइल फटने से इस इंडोनेशियाई सैनिक की मौत हुई।
- दो अन्य सैनिक: 30 मार्च को एक काफिले पर सड़क किनारे रखे बम (IED) से हमला हुआ, जिसमें दो और सैनिकों की जान गई।
- घायल सैनिक: इन घटनाओं में पांच अन्य इंडोनेशियाई सैनिक भी घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।
इस घटना पर UN और दूसरे देशों की क्या प्रतिक्रिया है?
संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षा प्रमुख जीन-पियरे लैक्रोइक्स ने इन हमलों को बेहद गंभीर बताया है और कहा है कि शांति रक्षकों पर हमला करना युद्ध अपराध माना जा सकता है। इंडोनेशिया ने मांग की है कि इजरायल के बयानों के बजाय UN अपनी स्वतंत्र जांच करे ताकि न्याय मिल सके।
| संबंधित पक्ष | मुख्य बयान |
|---|---|
| संयुक्त राष्ट्र (UN) | जांच जारी है और इसमें वक्त लग सकता है, दोषियों की पहचान जरूरी है। |
| इंडोनेशिया | शांति रक्षकों की सुरक्षा सबसे ऊपर है, इस हमले की जवाबदेही तय होनी चाहिए। |
| इजरायली सेना | सेना का कहना है कि घटना के वक्त उनके सैनिक उस इलाके में तैनात नहीं थे। |
इंडोनेशिया की सरकार ने जोर देकर कहा है कि लेबनान में इजरायली सैन्य अभियानों की वजह से वहां शांति बनाए रखने वाले सैनिकों के लिए खतरा काफी बढ़ गया है। UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इन मौतों की कड़े शब्दों में निंदा की है और इलाके में तनाव कम करने की अपील की है।




