UN चीफ की बड़ी चेतावनी, मिडिल ईस्ट संकट से पूरी दुनिया पर मंडराया महायुद्ध का खतरा, प्रवासियों की बढ़ी चिंता.
संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दुनिया को एक बेहद गंभीर चेतावनी दी है। मिडिल ईस्ट में चल रहा संकट अब अपने दूसरे महीने में पहुंच गया है और गुटेरेस के अनुसार दुनिया इस समय एक बड़े युद्ध की कगार पर खड़ी है। न्यूयॉर्क में सुरक्षा परिषद के बाहर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस संकट के वैश्विक स्तर पर बेहद खतरनाक नतीजे होंगे। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक है क्योंकि तनाव बढ़ने से उनकी सुरक्षा और आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ता है।
UN चीफ ने किन देशों से क्या अपील की है?
महासचिव ने साफ शब्दों में अमेरिका और इसराइल से युद्ध को रोकने की अपील की है क्योंकि इससे आम लोगों की परेशानी और तबाही लगातार बढ़ रही है। साथ ही उन्होंने ईरान को अपने पड़ोसियों पर हमले बंद करने की सलाह दी है। उन्होंने कुछ मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया:
- आम लोगों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करना सबसे जरूरी है।
- सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।
- विवादों को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए।
- जीन अरनॉल्ट (Jean Arnault) को राजनयिक कोशिशों के लिए विशेष दूत के रूप में क्षेत्र में भेजा गया है।
खाड़ी देशों में मौजूदा स्थिति और प्रवासियों पर असर
2 अप्रैल 2026 को इस संकट से जुड़ी कई बड़ी घटनाएं सामने आई हैं जो सीधे तौर पर खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को प्रभावित कर रही हैं। सऊदी अरब और UAE जैसे सुरक्षित माने जाने वाले देशों में भी मिसाइल और ड्रोन की खबरें आ रही हैं। इससे वहां रहने वाले प्रवासियों और यात्रा करने वाले लोगों के मन में डर पैदा हो रहा है।
| देश/स्थान | घटना का विवरण |
|---|---|
| सऊदी अरब | गुरुवार सुबह कम से कम 4 ईरानी ड्रोनों को बीच रास्ते में ही मार गिराया। |
| UAE (KEZAD) | अबू धाबी के पास एक मिसाइल को इंटरसेप्ट करके नष्ट किया गया। | इसराइल ने पिछले 24 घंटों में हिजबुल्लाह के दर्जनों ठिकानों पर हमले किए। |
| होर्मुज जलडमरूमध्य | रास्ता बंद होने की चेतावनी, जिससे तेल और ऊर्जा की कीमतों पर असर पड़ सकता है। |
गुटेरेस ने यह भी चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आवाजाही रुकने से दुनिया के सबसे गरीब और कमजोर देशों के लिए जीना मुश्किल हो जाएगा। ऊर्जा आयात पर निर्भर रहने वाले समाज इस समय भारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।




