ईरान ने गल्फ में दुश्मन का लड़ाकू विमान गिराने का किया दावा, अमेरिका ने कहा हमारे सभी प्लेन सुरक्षित, दुबई और बहरीन पर भी नजर
मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के बीच हलचल बढ़ गई है। ईरान की IRGC ने 2 अप्रैल 2026 को दावा किया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने गल्फ के ऊपर केशम आइलैंड (Qeshm Island) के पास एक दुश्मन देश के लड़ाकू विमान को मार गिराया है। यह विमान टकराने के बाद समुद्र में गिर गया। हालांकि, अमेरिका ने तुरंत इन खबरों का खंडन किया है जिससे स्थिति काफी उलझ गई है।
क्या वाकई में कोई विमान गिराया गया है?
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का कहना है कि उन्होंने अपने क्षेत्र की रक्षा करते हुए इस विमान को निशाना बनाया। इसके ठीक बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बयान जारी कर कहा कि उनके सभी फाइटर एयरक्राफ्ट पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनकी गिनती पूरी है। अमेरिका ने यह भी कहा कि ईरान पहले भी आधा दर्जन बार इस तरह के झूठे दावे कर चुका है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भी चेतावनी दी है कि अगर हमले नहीं रुके तो यह विवाद एक बड़े युद्ध में बदल सकता है।
दुबई और बहरीन के बुनियादी ढांचे पर क्या असर हुआ?
ईरान ने सिर्फ विमान गिराने का ही दावा नहीं किया है बल्कि कुछ अन्य चौंकाने वाली बातें भी कही हैं। IRGC ने दावा किया है कि उन्होंने दुबई में एक डेटा सेंटर और बहरीन में क्लाउड कंप्यूटिंग फैसिलिटी को निशाना बनाया है। हालांकि इन दावों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
| जगह | घटना की जानकारी |
|---|---|
| दुबई (UAE) | ओरेकल डेटा सेंटर पर हमले का दावा किया गया। |
| बहरीन | अमेज़न फैसिलिटी पर हमले का दावा, मंत्रालय ने आग की पुष्टि की। |
| तेहरान के पास | इजराइल और अमेरिका के हमलों में स्टील प्लांट को नुकसान। |
| बगदाद (इराक) | अमेरिकी दूतावास ने अगले 48 घंटों के लिए हमले का अलर्ट जारी किया। |
खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह समय सावधानी बरतने वाला है। बहरीन ने सुरक्षा को लेकर संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव लाने की तैयारी की है ताकि समुद्र में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान पर उनके हमले अगले दो से तीन हफ्तों तक और जारी रह सकते हैं, जिससे आने वाले दिनों में यात्रा और सुरक्षा नियमों में बदलाव देखने को मिल सकता है।




