Strait of Hormuz बंद करने पर ईरान की बढ़ी मुसीबत, 40 देशों ने कड़ा किया रुख, अब लग सकते हैं एक साथ कई प्रतिबंध.
ईरान द्वारा Strait of Hormuz को बंद किए जाने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सख्त रुख अपना लिया है। ब्रिटेन की मेजबानी में 40 से ज्यादा देशों ने एक वर्चुअल मीटिंग की है जिसमें ईरान पर आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इस समुद्री रास्ते के बंद होने से दुनिया भर में तेल और सामान की आवाजाही पर संकट खड़ा हो गया है जिससे गल्फ देशों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
ℹ️: Trump का बड़ा ऐलान, 3 हफ्तों में ईरान से हटेगी अमेरिकी सेना, UAE और सऊदी अरब ने भी गिराए कई ड्रोन.।
मीटिंग में क्या बड़े फैसले लिए गए और क्या है पूरा मामला?
ब्रिटेन की विदेश मंत्री Yvette Cooper ने गुरुवार 2 अप्रैल 2026 को इस अहम मीटिंग की मेजबानी की। इसमें दुनिया के 40 से ज्यादा देशों ने हिस्सा लिया और मांग की कि Strait of Hormuz को तुरंत और बिना किसी शर्त के खोला जाए। मीटिंग में फैसला हुआ कि सभी देश मिलकर ईरान पर नए प्रतिबंध लगाएंगे ताकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का पालन कराया जा सके। गल्फ देशों के साथ-साथ अमेरिका और यूरोपीय देशों ने भी इस पर सहमति जताई है। इसके अलावा अगले हफ्ते सैन्य योजनाकार भी मिलने वाले हैं ताकि इस रास्ते को सुरक्षित बनाया जा सके।
किस देश ने क्या कड़ा बयान जारी किया है?
इस तनावपूर्ण स्थिति को लेकर अलग-अलग देशों के प्रमुखों ने अपनी बात रखी है। इससे होने वाली परेशानी को देखते हुए कई कड़े बयान सामने आए हैं:
- डोनाल्ड ट्रम्प (अमेरिका): उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर रास्ता नहीं खुला तो ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला किया जा सकता है।
- इमैनुएल मैक्रों (फ्रांस): फ्रांस अंतरराष्ट्रीय मिशन की तैयारी कर रहा है लेकिन फिलहाल युद्ध के बीच बल प्रयोग को रिस्की माना है।
- GCC महासचिव: उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से ईरान के हमलों से बचाने के लिए बल प्रयोग की अनुमति मांगी है।
- चीन: चीन का कहना है कि अमेरिका और इसराइल के हमले ही इस ब्लॉक के मुख्य कारण हैं।
- ईरान: ईरान के सैन्य प्रवक्ता ने साफ़ कहा है कि यह रास्ता अमेरिका और इसराइल के लिए लंबे समय तक बंद रहेगा।
कुवैत एयरपोर्ट पर हमला और प्रवासियों पर असर
इसी बीच कुवैत से एक बड़ी खबर आई है जहां ईरान के एक ड्रोन ने कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फ्यूल टैंकों को निशाना बनाया। इस हमले की वजह से वहां भीषण आग लग गई थी। हालांकि इसमें कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है लेकिन सुरक्षा को लेकर डर बढ़ गया है। गल्फ देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति मुश्किल भरी हो सकती है क्योंकि समुद्री रास्ता बंद होने से महंगाई बढ़ सकती है और उड़ानों पर भी असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का कहना है कि वे सुरक्षित नेविगेशन बहाल करने को अपनी प्राथमिकता बना रहे हैं।




