अमेरिका और इसराइल ने ईरान के B1 ब्रिज को किया तबाह, 8 की मौत और 95 घायल, खाड़ी देशों में अलर्ट
ईरान के करज शहर में स्थित ऐतिहासिक B1 ब्रिज पर अमेरिका और इसराइल की ओर से किए गए हवाई हमलों में आठ आम नागरिकों की जान चली गई है। इस हमले में करीब 95 लोग घायल हुए हैं जिन्हें इलाज के लिए स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। यह हमला गुरुवार 2 अप्रैल 2026 को हुआ और इसने क्षेत्र में पहले से चल रहे सैन्य तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है।
हमले में क्या-क्या नुकसान हुआ और कौन बने शिकार?
ईरान के अलबोर्ज प्रांत में स्थित B1 ब्रिज को दो बार निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार मारे गए लोगों में वहां से गुजर रहे यात्री, स्थानीय गांव के निवासी और नेचर डे मनाने आए परिवार शामिल थे। यह पुल तेहरान और करज को जोड़ने वाली एक मुख्य सड़क का हिस्सा है और इसे मिडल ईस्ट का सबसे ऊंचा पुल माना जाता है।
- मौत का आंकड़ा: हमले में अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
- घायलों की स्थिति: कुल 95 लोग घायल हुए हैं जिनमें से कुछ की हालत नाजुक है।
- सिविलियन ढांचा: हमले में एक पुराने मेडिकल सेंटर और इंडस्ट्रियल फैसिलिटी को भी नुकसान पहुंचा है।
- बिजली संकट: धमाकों के बाद कई इलाकों में बिजली गुल होने की खबर मिली है।
प्रमुख नेताओं और देशों की ओर से आए बड़े बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे एक बड़ी कामयाबी बताया है। दूसरी ओर ईरान ने इस हमले का कड़ा जवाब देने की बात कही है। इस घटनाक्रम का विवरण नीचे दी गई टेबल में देखा जा सकता है।
| व्यक्ति या देश | जारी किया गया आधिकारिक बयान |
|---|---|
| Donald Trump (USA) | ईरान का सबसे बड़ा पुल अब गिर चुका है और यह दोबारा कभी इस्तेमाल नहीं होगा। |
| Masoud Pezeshkian (Iran) | ईरान अपनी सुरक्षा के लिए हर संभव क्षमता का उपयोग करेगा। |
| Abbas Araghchi (Iran) | सिविल ठिकानों पर हमला दुश्मन की हताशा का संकेत है, हम इसे और मजबूत बनाएंगे। |
| UN Secretary-General | मिडल ईस्ट में युद्ध के फैलने का बड़ा खतरा है, शांति की अपील की जाती है। |
क्या खाड़ी देशों पर भी पड़ेगा इस हमले का असर?
ईरान की मीडिया ने इस हमले के जवाब में कई पड़ोसी देशों के बड़े पुलों को संभावित निशाने के तौर पर दिखाया है। इसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और जॉर्डन के इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम शामिल हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि तनाव बढ़ने से हवाई यात्रा और सुरक्षा नियमों में बदलाव हो सकता है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का दावा है कि इस पुल का इस्तेमाल मिसाइल और ड्रोन की सप्लाई के लिए किया जा रहा था, इसलिए इसे निशाना बनाया गया।




