इसराइल ने अमेरिका को दी जानकारी, ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला गिरा सकता है वहां की सरकार.
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच इसराइल ने अमेरिका को एक बड़ी रिपोर्ट सौंपी है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर ईरान के बिजली घरों और तेल के ठिकानों पर हमला किया जाता है, तो वहां की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा. इसराइल का मानना है कि इस आर्थिक चोट की वजह से ईरान में मौजूदा सरकार का तख्तापलट भी हो सकता है. फिलहाल इसराइल अपनी सेना को उन ठिकानों की लिस्ट तैयार करने के निर्देश दे चुका है जिन्हें निशाना बनाया जाना है.
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इसराइल और अमेरिका की क्या है योजना?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्रालय ने सेना को ईरान के एनर्जी सेक्टर के ठिकानों की पहचान करने को कहा है. अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कड़े संकेत दिए हैं कि अगर जरूरी हुआ तो ईरान के पुलों और पावर स्टेशनों पर कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि, अमेरिका इस बात को लेकर भी सतर्क है कि इन हमलों का असर तेल की कीमतों और आम जनता की राय पर क्या पड़ेगा. वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच इन रणनीतियों को लेकर लगातार बातचीत का दौर जारी है.
खाड़ी देशों में सुरक्षा और हालिया घटनाएं
- सऊदी अरब की डिफेंस टीम ने सात ड्रोन को हवा में ही मार गिराने की पुष्टि की है.
- यूएई ने भी अपनी सीमा की सुरक्षा करते हुए मिसाइल खतरों को सफलतापूर्वक नाकाम किया है.
- कुवैत के बिजली और पानी के प्लांट पर हमले की खबर है, जिसका असर वहां की बुनियादी सेवाओं पर पड़ा है.
- ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके ठिकानों को नुकसान पहुंचा, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर देगा.
- इस तनाव का असर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर भी पड़ सकता है क्योंकि इससे सुरक्षा और महंगाई दोनों बढ़ सकती हैं.
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार का मुख्य केंद्र है. अगर होर्मुज के रास्ते में रुकावट आती है, तो जहाजों की आवाजाही और तेल की सप्लाई पर सीधा असर पड़ेगा. अभी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी इस मुद्दे पर चर्चा होनी थी, लेकिन छुट्टी की वजह से उसे टाल दिया गया है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका इसराइल की इस योजना को हरी झंडी देता है या नहीं.




