Strait of Hormuz को लेकर UAE और 40 देशों की बड़ी बैठक, समुद्री रास्ते पर बढ़ते खतरे से दुनिया परेशान.
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने हाल ही में Strait of Hormuz को लेकर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लिया है. इस बैठक की मेजबानी United Kingdom ने की थी, जिसमें दुनिया के 40 से ज़्यादा देश शामिल हुए. UAE की मंत्री Reem bint Ebrahim Al Hashimy ने इस दौरान समुद्री रास्तों में हो रही दखलअंदाजी को वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है. उन्होंने साफ कहा कि इस रास्ते को बंद करना या व्यापार में बाधा डालना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए मुसीबत बन सकता है. खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए भी यह खबर जरूरी है क्योंकि समुद्री व्यापार रुकने से महंगाई और ऊर्जा की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है.
क्यों जरूरी है यह समुद्री रास्ता और मीटिंग में क्या फैसला हुआ?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल और गैस की बड़ी सप्लाई होती है. बैठक में भाग लेने वाले देशों ने इस रास्ते को तुरंत और बिना शर्त खोलने की मांग की है. 28 फरवरी से अब तक करीब 20,000 नाविक और 2,000 जहाज इस इलाके में फंसे हुए हैं. यहाँ इस संकट से जुड़ी कुछ मुख्य बातें दी गई हैं:
- मीटिंग की तारीख: यह चर्चा 2 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई.
- प्रमुख मांग: समुद्री रास्तों को स्वतंत्र रखने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने की अपील की गई.
- ईरान का नया नियम: ईरान और ओमान एक ऐसी प्रणाली बना रहे हैं जिससे जहाजों को वहां से गुजरने के लिए पहले परमिट लेना होगा.
- आर्थिक प्रभाव: रास्ते बंद होने से दुनिया भर में ईंधन और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ रहे हैं.
UAE पर हमलों की जानकारी और भविष्य की योजना
UAE की मंत्री Reem bint Ebrahim Al Hashimy ने बैठक में बताया कि उनका देश पिछले कुछ समय से लगातार हमलों का सामना कर रहा है. उन्होंने जानकारी दी कि 28 फरवरी के बाद से UAE पर 2,500 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए गए हैं. ये हमले ज्यादातर नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाकर किए गए हैं. इन हालातों को देखते हुए Bahrain ने सुरक्षा बढ़ाने के लिए UN में एक प्रस्ताव भी पेश किया है. अगले मंगलवार को सैन्य अधिकारियों की एक बैठक होने वाली है, जिसमें समुद्री रास्ते से माइंस हटाने और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर चर्चा होगी. फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा है कि इस रास्ते को बलपूर्वक खोलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए कूटनीतिक रास्तों पर ज़ोर दिया जा रहा है.




