अमेरिका और इसराइल नहीं तोड़ पाए ईरान की हिम्मत, बड़े नेताओं की हत्या के बाद भी सत्ता पलटने में रहे नाकाम.
विदेशी एक्सपर्ट वाएल अव्वाद ने ताजा रिपोर्ट में बताया है कि अमेरिका और इसराइल ईरान को अंदरूनी तौर पर कमजोर करने में सफल नहीं हो पाए हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव के बीच ईरान के कई बड़े नेताओं की हत्या की गई और देश के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया गया, फिर भी वहां की सरकार को नहीं बदला जा सका। एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए और जनता के बीच असंतोष पैदा करने की कोशिश की, लेकिन ये सभी कोशिशें अब तक बेकार साबित हुई हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?
- एक्सपर्ट के अनुसार अमेरिका और इसराइल लंबे समय से ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहे हैं।
- इसराइल ने ईरान के सैन्य ठिकानों और सुप्रीम लीडर के आवास के पास तक हमले किए ताकि वहां अराजकता फैल सके।
- ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी देशों की तरफ मिसाइलें दागी हैं।
- रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने अब अमेरिका और इसराइल के साथ एक लंबी जंग की तैयारी कर ली है।
- ईरान की तरफ से करीब 9000 ठिकानों पर आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की मदद से बमबारी की जानकारी दी गई है।
खाड़ी देशों और वहां रहने वाले लोगों पर इसका क्या असर होगा?
इस युद्ध और तनाव का असर अब खाड़ी देशों (GCC) पर भी साफ दिखने लगा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके बिजली घर या पुलों को दोबारा निशाना बनाया गया, तो वह कड़ा बदला लेगा। हाल ही में यूएई (UAE) की सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है जिसे ईरान और हिज़्बुल्लाह से पैसा मिल रहा था। यह नेटवर्क बिजनेस के नाम पर देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने की साजिश रच रहा था। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों और सुरक्षा नियमों में बदलाव हो सकता है।
क्षेत्र में जारी ताजा सैन्य गतिविधियां और हमले
| देश/संस्था | ताजा घटनाक्रम और स्थिति | |
|---|---|---|
| ईरान | 66वीं लहर के तहत इसराइल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। | |
| इसराइल (IDF) | ईरान से आ रही मिसाइलों को रोकने के लिए डिफेंस सिस्टम सक्रिय किया। | |
| अमेरिका | जंग के बीच सैन्य खर्च के लिए 1.5 ट्रिलियन डॉलर का बजट मांगा गया। | |
| यूएई (UAE) | ईरान समर्थित टेरर नेटवर्क को पकड़कर वित्तीय साजिश को नाकाम किया। |




