ईरान ने इसराइल पर दागी मिसाइलें, उत्तरी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना, 50 लाख लोग पहुंचे शेल्टर.
4 अप्रैल 2026 को ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी IRNA ने जानकारी दी है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इसराइल के उत्तरी इलाकों में मौजूद सैन्य सेंटरों पर बड़े हमले किए हैं. यह हमला ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के 91वें चरण का हिस्सा बताया जा रहा है. ईरान की इस कार्रवाई से तेल अवीव और हाइफा जैसे शहरों में काफी असर देखा गया और करीब 50 लाख लोगों को सुरक्षा के लिए जमीन के नीचे बने शेल्टरों में जाना पड़ा.
हमले में किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
IRGC और उसके सहयोगी गुटों ने इसराइल के कई रणनीतिक ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं. हमले की मुख्य जानकारी नीचे दी गई टेबल में देख सकते हैं:
| इलाका | टारगेट और मुख्य अपडेट |
|---|---|
| उत्तरी इसराइल | सफेद (Safed) के पास सैन्य कमांड सेंटर को निशाना बनाया गया. |
| तेल अवीव और हाइफा | इन मुख्य शहरों के रिहायशी और सैन्य इलाकों पर मिसाइलें दागी गईं. |
| दक्षिण इसराइल | यमन की तरफ से डिमोना और दक्षिणी हिस्सों पर हमले किए गए. |
| सेंट्रल इसराइल | पेटाह टिकवा और मजकेरत बात्या में मिसाइल गिरने से तीन लोग घायल हुए. |
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव और खाड़ी देशों पर असर
इस जंग के बीच एक बड़ी खबर यह भी है कि ईरान में एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान को मार गिराया गया है. ईरान की सरकारी मीडिया ने इस घटना की जिम्मेदारी ली है. इसके जवाब में IDF ने तेहरान में मौजूद IRGC के बेस और मोबाइल कमांड पोस्ट पर बमबारी की है. ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर लेबनान और फिलिस्तीन में हमले नहीं रुके तो वह अपनी कार्रवाई और तेज करेगा.
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि तनाव की वजह से समुद्री रास्तों और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. ईरान ने पहले भी UAE, कुवैत और सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी मिलिट्री बेस को लेकर बयान दिए थे. इसके अलावा Strait of Hormuz में सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर भी ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को चेतावनी दी है, जिससे आने वाले दिनों में समुद्री व्यापार और यात्रा प्रभावित हो सकती है.




