Iran New Warning: ईरान ने बाब अल-मंडेब को लेकर दी चेतावनी, तेल और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने का खतरा
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालबाफ ने बाब अल-मंडेब समुद्री रास्ते के इस्तेमाल को लेकर कुछ कड़े सवाल किए हैं। उन्होंने पूछा कि इस रास्ते से किन देशों और कंपनियों का सबसे ज्यादा माल आता-जाता है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है क्योंकि यह रास्ता दुनिया के कुल व्यापार का 14 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। गालबाफ की बातों को ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
किन देशों के व्यापार पर पड़ेगा इसका सबसे ज्यादा असर?
बाब अल-मंडेब के जरिए होने वाले व्यापार में कई बड़े देशों की हिस्सेदारी है। ईरान के स्पीकर ने खासतौर पर तेल, गैस, गेहूं और खाद जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई पर सवाल उठाए हैं। आंकड़ों के मुताबिक इस रास्ते में कुछ देशों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है:
- Russia: साल 2025 की शुरुआत में रूस ने इस रास्ते से सबसे ज्यादा कच्चे तेल की सप्लाई की है और उनके जहाज अब तक सुरक्षित रहे हैं।
- Saudi Arabia: सऊदी अरब ने हॉर्मुज से बचने के लिए लाल सागर का रास्ता अपनाया था, लेकिन यहाँ भी उनकी सप्लाई में 50 प्रतिशत तक की कमी आई है।
- China and Greece: इन देशों के जहाज ऐतिहासिक रूप से इस समुद्री रास्ते का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते आए हैं।
क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सुरक्षा की मौजूदा स्थिति क्या है?
यह बयान ऐसे समय में आया है जब लाल सागर में पहले से ही यमन के हूती विद्रोही जहाजों को निशाना बना रहे हैं। इसकी वजह से बहुत सी शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों का रास्ता बदल दिया है और वे अब अफ्रीका के नीचे से लंबा चक्कर लगाकर जा रहे हैं। इससे सामान पहुँचने में देरी हो रही है और खर्चा भी बढ़ गया है।
अमेरिका ने भी स्थिति को देखते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के लिए 40 अरब डॉलर की बीमा गारंटी बढ़ा दी है। ईरान के सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका कोई भी गलत कदम उठाता है, तो वे बाब अल-मंडेब के रास्ते को लेकर गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। गालबाफ का यह नया बयान दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती पेश करता है क्योंकि इस रास्ते से दुनिया का 5 प्रतिशत तेल गुजरता है।




