ईरान के विदेश मंत्री का बड़ा बयान, अमेरिका का शांति प्रस्ताव ठुकराया, कहा पाकिस्तान के साथ हैं मजबूत रिश्ते
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने क्षेत्र में जारी तनाव को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस थोपी गई जंग को पूरी तरह खत्म करने की अपील की है और साफ किया कि ईरान शांति का पक्षधर है। अराघची ने अमेरिकी मीडिया के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि ईरान पाकिस्तान की शांति कोशिशों का साथ नहीं दे रहा है। ईरान ने पाकिस्तान के प्रति अपना आभार जताया है और कहा है कि उनके बीच कूटनीतिक रिश्ते बहुत मजबूत हैं।
ईरान ने क्यों ठुकराया अमेरिका का युद्धविराम प्रस्ताव?
ईरान ने हाल ही में अमेरिका की तरफ से आए 48 घंटे के युद्धविराम के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। ईरान के मुताबिक अमेरिका की शर्तें ऐसी थीं जिन्हें मानना संभव नहीं था। विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि क्षेत्र में असुरक्षा की मुख्य वजह अमेरिका और इसराइल के गैर-कानूनी हमले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहकर ही हमलावर जहाजों को रोकने की कार्रवाई कर रहा है ताकि सुरक्षा बनी रहे और गैर-जंगी जहाजों को आने-जाने में कोई दिक्कत न हो।
क्षेत्र में सैन्य हलचल और कूटनीतिक प्रयासों का ताजा अपडेट
पिछले कुछ घंटों में खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं और कई देशों के बीच बातचीत का दौर जारी है। इन घटनाओं को नीचे दी गई जानकारी से समझा जा सकता है:
| घटना/विषय | मुख्य जानकारी |
|---|---|
| अमेरिकी सैन्य नुकसान | ईरान की फायरिंग में अमेरिका के दो बचाव हेलीकॉप्टर टकरा गए और एक लड़ाकू विमान भी दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। |
| पाकिस्तान की भूमिका | पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री मुहम्मद इशाक डार और विदेश मंत्रालय ने ईरान के स्पष्टीकरण का स्वागत किया है। |
| नए शांति प्रयास | पाकिस्तान के साथ मध्यस्थता की कोशिशों के धीमे होने के बाद अब तुर्की और मिस्र कतर या इस्तांबुल में बातचीत की जगह तलाश रहे हैं। |
| अन्य देशों से बातचीत | फिलीपींस और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रियों ने भी अराघची से फोन पर बात कर सुरक्षा हालातों पर चर्चा की है। |
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को भी झूठा बताया है जिसमें कहा गया था कि ईरान ने खुद युद्धविराम की मांग की थी। मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने भी इन बयानों की आलोचना की है। फिलहाल क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कतर और इस्तांबुल जैसे वैकल्पिक स्थानों पर बातचीत शुरू करने की तैयारी चल रही है।




