ईरान के शहरों में तैनात हुए अफगान लड़ाके, IRGC और बासिज की मदद के लिए मिलिशिया को उतारा गया
ईरान में सुरक्षा हालात को देखते हुए एक बड़ी खबर सामने आई है। अफगान लड़ाकों के संगठन फातमियून मिलिशिया को ईरान के अलग-अलग शहरों में तैनात कर दिया गया है। यह लड़ाके ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड और बासिज फोर्स की मदद के लिए जमीन पर उतरे हैं। सऊदी अरब के मीडिया सूत्रों ने इस तैनाती को लेकर ताजा जानकारी साझा की है। यह कदम ईरान की आंतरिक सुरक्षा और सैन्य पकड़ को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
फातमियून मिलिशिया की तैनाती का क्या कारण है?
फातमियून एक अफगान शिया मिलिशिया है जिसे ईरान की सेना का पूरा समर्थन प्राप्त है। इन्हें अक्सर ईरान के हितों की रक्षा के लिए क्षेत्रीय संघर्षों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के अंदरूनी शहरों में सुरक्षा बढ़ाने और बासिज फोर्स का साथ देने के लिए इन्हें तैनात किया गया है। ईरान की राजनीतिक स्थिति और सैन्य ढांचे में आ रहे बदलावों के बीच इस मिलिशिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह लड़ाके सीधे तौर पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की कुद्स फोर्स के साथ मिलकर काम करते हैं।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव और ताजा हालात
ईरान और उसके पड़ोसियों के बीच पिछले कुछ दिनों में कई सैन्य घटनाएं दर्ज की गई हैं। हाल ही में कतर ने भी ईरान की तरफ से होने वाले ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकने का दावा किया है। इस क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है जिसके कारण खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों की चिंता भी बढ़ी है।
- ईरान ने कुछ खास देशों के जहाजों के लिए समुद्री रास्ता बंद करने का संकेत दिया है।
- अमेरिका और इसराइल के साथ ईरान का सैन्य टकराव पिछले कुछ घंटों में तेज हुआ है।
- ईरान के भीतर लाखों लोगों ने देश की सुरक्षा के लिए हथियार उठाने का संकल्प लिया है।
- जॉर्डन और अन्य पड़ोसी देशों ने अपनी सीमा के पास ईरानी मिलिशिया की बढ़ती हरकतों पर नाराजगी जताई है।
इस सैन्य तैनाती का असर खाड़ी देशों के व्यापार और यातायात पर भी पड़ सकता है। समुद्री रास्तों पर सख्ती होने से सामान की सप्लाई में देरी होने की संभावना है। फिलहाल ईरान ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को उच्चतम स्तर पर रखा है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का जवाब देने के लिए इन मिलिशिया गुटों को तैयार किया है।




