सऊदी अरब ने रचा इतिहास, चंद्रमा के मिशन Artemis II के साथ लॉन्च किया अपना सैटेलाइट.
सऊदी अरब ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल किया है। नासा के Artemis II मिशन के साथ सऊदी अरब का एक विशेष सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा गया है। यह सैटेलाइट मुख्य रूप से अंतरिक्ष के मौसम और सूरज से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी जुटाने का काम करेगा। 1 अप्रैल 2026 को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से इसे सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। यह उपलब्धि सऊदी अरब के विजन 2030 के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
Artemis II मिशन और सऊदी सैटेलाइट से जुड़ी अहम जानकारी
सऊदी अरब की स्पेस एजेंसी और नासा के बीच हुए समझौते के बाद इस सैटेलाइट को इस महत्वपूर्ण मिशन का हिस्सा बनाया गया है। यह मिशन करीब 10 दिनों तक चलेगा जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाकर वापस धरती पर आएंगे।
- यह सऊदी अरब का पहला सैटेलाइट है जो खास तौर पर स्पेस वेदर यानी अंतरिक्ष के मौसम की रिसर्च करेगा।
- इस सैटेलाइट की मदद से सूरज से निकलने वाली किरणों और उनके पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर असर का डेटा मिलेगा।
- इस डेटा का इस्तेमाल भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों में यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
- किंग अब्दुलअजीज सिटी फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी इस प्रोजेक्ट में तकनीकी मदद दे रहा है।
मिशन में कौन-कौन है शामिल और क्या होगा काम?
इस ऐतिहासिक यात्रा में कुल चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। इनमें नासा के तीन यात्री और कनाडाई स्पेस एजेंसी का एक यात्री हिस्सा ले रहा है। यह पूरी टीम अंतरिक्ष में जीवन रक्षक प्रणालियों और संचार माध्यमों का टेस्ट करेगी। सऊदी अरब का सैटेलाइट इन वैज्ञानिकों को सूरज की गतिविधियों और सैटेलाइट कम्युनिकेशन में आने वाली दिक्कतों को समझने में मदद करेगा।
| मिशन का नाम | Artemis II |
|---|---|
| लॉन्च की तारीख | 1 अप्रैल 2026 |
| मिशन की अवधि | 10 दिन |
| मुख्य एजेंसी | NASA और सऊदी स्पेस एजेंसी |
सऊदी अरब इस मिशन के जरिए अपनी तकनीकी क्षमता को दुनिया के सामने रख रहा है। इससे न केवल देश के युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि बढ़ेगी बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सऊदी अरब की साख मजबूत होगी। नासा के प्रशासक ने भी इस मिशन की सुरक्षा और सफलता को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई है।




