ईरान ने ठुकराया डोनल्ड ट्रंप का अल्टीमेटम, 48 घंटे में डील करने की मिली थी चेतावनी, अब खाड़ी देशों में तनाव चरम पर
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और प्रवासियों के लिए बड़ी खबर आ रही है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का जो अल्टीमेटम दिया था, उसे ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है. ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर इस समय सीमा में समझौता नहीं हुआ या हॉर्मुज का रास्ता नहीं खुला, तो कड़ी सैन्य कार्रवाई होगी. इस फैसले के बाद अब पूरे मिडिल ईस्ट में हलचल तेज हो गई है और तनाव बढ़ गया है.
ईरान का फैसला और ट्रंप की 48 घंटे की मोहलत
राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि उनके पास समझौता करने के लिए सिर्फ 48 घंटे का समय है. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने साफ कहा है कि अमेरिकी प्रस्ताव पूरी तरह से तर्कहीन और जरूरत से ज्यादा मांगे रखने वाले हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने भी अमेरिका के साथ किसी भी सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है. ईरान का कहना है कि वे केवल ओमान जैसे देशों के जरिए ही परोक्ष रूप से बात कर सकते हैं. इस स्थिति ने खाड़ी में काम करने वाले प्रवासियों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है.
पिछले 24 घंटों में हुई बड़ी घटनाएं और सैन्य कार्रवाई
4 अप्रैल 2026 को इस विवाद ने हिंसक रूप ले लिया है. रिपोर्ट के मुताबिक ईरान और खाड़ी क्षेत्र के ऊपर दो अमेरिकी लड़ाकू विमान मार गिराए गए हैं. इसके अलावा ईरान के बुशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास भी हमला हुआ है, जिससे वहां नुकसान पहुंचा है. इस बढ़ते तनाव के कारण इराक ने ईरान के साथ अपनी शलमचेह बॉर्डर क्रॉसिंग को भी बंद कर दिया है. नीचे दी गई टेबल में आप पिछले 24 घंटों की मुख्य घटनाएं देख सकते हैं:
| स्थान/घटना | अपडेट की जानकारी |
|---|---|
| अमेरिकी विमान | ईरान ने एक F-15 और एक A-10 विमान गिराने का दावा किया |
| बुशहर परमाणु संयंत्र | प्लांट के पास हवाई हमला, एक सुरक्षा गार्ड की मौत |
| इराक-ईरान बॉर्डर | शलमचेह बॉर्डर क्रॉसिंग पूरी तरह बंद की गई |
| सैन्य हमले | कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल दागने की खबर |
| मध्यस्थता | पाकिस्तान और ओमान बातचीत की कोशिशों में जुटे |
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कुवैत, बहरीन और यूएई में मौजूद कुछ ठिकानों पर मिसाइल हमलों की बात कही है, हालांकि इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. ट्रंप ने चीन और फ्रांस जैसे देशों से भी हॉर्मुज के रास्ते को खुला रखने के लिए मदद मांगी है. प्रवासियों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय खबरों और दूतावास के निर्देशों पर नजर बनाए रखें क्योंकि आने वाले कुछ दिन काफी संवेदनशील हो सकते हैं.




