Trump ने ईरान को दी मंगलवार तक की मोहलत, Strait of Hormuz नहीं खुला तो पुल और बिजली घर उड़ाने की दी धमकी.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बहुत बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने ईरान को मंगलवार तक का आखिरी समय देते हुए Strait of Hormuz को दोबारा खोलने की चेतावनी दी है। ट्रंप का कहना है कि अगर इस समय सीमा के भीतर रास्ता नहीं खोला गया, तो ईरान के पुलों और जरूरी बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से तबाह कर दिया जाएगा। इस फैसले के बाद से खाड़ी क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है और वैश्विक बाज़ार में भी हलचल तेज हो गई है।
इस विवाद से जुड़ी मुख्य बातें और ताज़ा अपडेट क्या है?
इस पूरे मामले को लेकर ट्रंप ने साफ तौर पर 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। शनिवार को जारी बयान में उन्होंने कहा कि अब समय खत्म हो रहा है और अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो बड़े हमले किए जाएंगे। ईरान के पावर प्लांट और नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर सीधे तौर पर अमेरिका के निशाने पर हैं। हालांकि ईरान ने इन धमकियों को बेअसर बताते हुए इन्हें घबराहट में लिया गया फैसला करार दिया है। ईरान के संसद अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि इस कार्रवाई से पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में जल सकता है।
खाड़ी देशों और प्रवासियों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
- Strait of Hormuz बंद होने से दुनिया भर में तेल और सामान की सप्लाई पर बुरा असर पड़ रहा है।
- ईरानी ड्रोन हमलों की वजह से कुवैत और बहरीन के पेट्रोकेमिकल प्लांट को पहले ही काफी नुकसान पहुंचा है।
- पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।
- ओमान ने भी ईरान के साथ यातायात को सामान्य करने के लिए चर्चा की है ताकि व्यापारिक जहाजों का रास्ता खुल सके।
- खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि तनाव बढ़ने से उनकी सुरक्षा और रोज़गार पर असर पड़ता है।
मौजूदा स्थिति का संक्षिप्त विवरण
| महत्वपूर्ण बिंदु | विवरण |
|---|---|
| डेडलाइन | मंगलवार (7 अप्रैल 2026 तक) |
| निशाने पर क्या है | ईरान के पुल, बिजली घर और इंफ्रास्ट्रक्चर |
| मध्यस्थ देश | पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र |
| प्रभावित देश | कुवैत, बहरीन और ओमान |
अमेरिका और इसराइल ने फरवरी के आखिर में ईरान पर हमले शुरू किए थे जिसके बाद से यह जलमार्ग बंद है। इस युद्ध में अब तक हज़ारों लोग जान गंवा चुके हैं। अब सभी की नज़रें मंगलवार की समय सीमा पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक रास्ते से इस विवाद को हल किया जा सकेगा या स्थिति और ज्यादा बिगड़ेगी।




