आज Kuwait में ईरान से आए 31 ड्रोन और 13 मिसाइल, तेल ठिकानों पर लगी आग, मंत्री ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग.
5 अप्रैल 2026 को कुवैत में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान की तरफ से कुवैत के तेल और बिजली ठिकानों पर बड़े ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए हैं। इस संकट के बीच कुवैत के तेल मंत्री Tariq Al-Roumi ने ऊर्जा बाज़ार की स्थिरता और सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही है। इन हमलों की वजह से कुवैत के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को नुकसान पहुँचा है लेकिन सरकारी एजेंसियां स्थिति को सामान्य करने में जुटी हुई हैं।
कुवैत में किन जगहों पर हुआ हमला और कितना नुकसान हुआ?
कुवैत के शुवाइख (Shuwaikh) तेल क्षेत्र परिसर में ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई जिससे काफी सामान का नुकसान हुआ है। यहाँ पर कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और तेल मंत्रालय के मुख्य कार्यालय मौजूद हैं। इसके अलावा ईरान की तरफ से हुए हमलों ने कुवैत के दो बिजली सब-स्टेशनों और पानी के प्लांट को भी अपना निशाना बनाया है। सेना की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटों में सुरक्षा बलों ने कई खतरों को हवा में ही खत्म किया है। हमले की जानकारी इस प्रकार है:
| हमले का जरिया | संख्या |
|---|---|
| बैलिस्टिक मिसाइल | 9 |
| क्रूज मिसाइल | 4 |
| ड्रोन (UAVs) | 31 |
इन हमलों की वजह से दो बिजली बनाने वाली यूनिट को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। गनीमत यह रही कि इन घटनाओं में किसी की जान जाने की खबर नहीं है लेकिन प्रॉपर्टी का नुकसान काफी ज़्यादा हुआ है।
तेल मंत्री और OPEC+ ने सुरक्षा के लिए क्या बड़े कदम उठाए हैं?
कुवैत के तेल मंत्री Tariq Al-Roumi ने साफ कर दिया है कि समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखना उनकी पहली प्राथमिकता है ताकि दुनिया भर में तेल की सप्लाई बिना रुके चलती रहे। 5 अप्रैल 2026 को हुई OPEC+ की मीटिंग में तेल के उत्पादन को मई महीने से 2,06,000 बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला लिया गया है। कुवैत का तेल मंत्रालय अब अपने इमरजेंसी प्लान को और भी मज़बूत कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसे हमलों से निपटा जा सके।
- ऊर्जा बाज़ार में स्थिरता बनाए रखने के लिए दूसरे खाड़ी देशों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।
- समुद्री रास्तों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए ओमान और ईरान के बीच भी बातचीत हुई है।
- कुवैत की सेना और एयर डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
- तेल मंत्रालय और डिफेंस मंत्रालय मिलकर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं।
कुवैत में रहने वाले प्रवासी और विशेषकर भारतीयों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि तेल की सप्लाई और बिजली व्यवस्था पर असर पड़ने से रोज़मर्रा की चीज़ों पर प्रभाव पड़ सकता है। सरकार ने लोगों से शांति बनाए रखने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की अपील की है।




