ईरान के 30 से ज़्यादा विश्वविद्यालयों पर हमला, अमेरिका और इसराइल पर लगा आरोप, अरब देशों में भी बढ़ा खतरा.
ईरान और इसराइल के बीच चल रहे तनाव में अब शिक्षा के केंद्रों को निशाना बनाया जा रहा है. ईरान सरकार ने दावा किया है कि इस युद्ध में उनके 30 से ज़्यादा विश्वविद्यालय और रिसर्च सेंटर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं. ईरान ने इन हमलों के लिए अमेरिका और इसराइल को ज़िम्मेदार ठहराया है. इस स्थिति को देखते हुए अब मिडिल ईस्ट के अन्य देशों में भी सुरक्षा को लेकर अलर्ट जारी किया गया है क्योंकि वहाँ स्थित संस्थानों पर भी हमले का डर बना हुआ है.
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ईरान के किन संस्थानों को पहुँचा है नुकसान?
ईरान के विज्ञान मंत्री हुसैन सिमाई सराफ ने 4 अप्रैल 2026 को आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि 28 फरवरी से जारी हमलों में शैक्षणिक संस्थाओं को भारी नुकसान हुआ है. हमले में मुख्य रूप से तेहरान की शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी और उसके लेज़र रिसर्च सेंटर को निशाना बनाया गया है. इसके अलावा ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और इस्फ़हान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी को भी बड़ा नुकसान पहुँचा है. चीन ने भी इस मामले पर कड़ा विरोध जताया है और स्कूलों पर हो रहे हमलों को मानवता के खिलाफ बताया है.
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और छात्रों पर असर
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की तरफ से आई धमकियों के बाद यूएई और कतर जैसे देशों में भी हलचल बढ़ गई है. खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय छात्रों और काम करने वाले लोगों के लिए यह खबर ज़रूरी है क्योंकि कई विदेशी विश्वविद्यालयों ने अपनी सुरक्षा बढ़ा दी है. ईरान ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी और इसराइली यूनिवर्सिटी उनके निशाने पर हो सकती हैं. सुरक्षा के लिहाज़ से कुछ जानकारी इस प्रकार है:
- UAE और Qatar: यहाँ की बड़ी यूनिवर्सिटीज़ ने बाहरी लोगों की एंट्री सीमित कर दी है.
- ऑनलाइन पढ़ाई: सुरक्षा कारणों से कई संस्थानों ने फिर से रिमोट लर्निंग का रास्ता अपनाया है.
- दूरी बनाने की सलाह: ईरान ने छात्रों और स्टाफ को इन कैंपस से एक किलोमीटर दूर रहने को कहा है.
इसराइल का दावा है कि उसने केवल उन्हीं रिसर्च सेंटरों को निशाना बनाया है जिनका संबंध ईरान के हथियार और परमाणु कार्यक्रम से है. हालांकि, ईरान इन आरोपों को गलत बता रहा है.




