ईरान और अमेरिका के बीच 45 दिन के सीज़फायर का प्रस्ताव, ट्रंप ने नहीं दी मंजूरी, सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी.
व्हाइट हाउस ने ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच 45 दिनों के युद्धविराम यानी सीज़फायर के एक नए प्रस्ताव की पुष्टि की है। हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक इस प्रस्ताव पर अपनी मंजूरी नहीं दी है, जिसकी वजह से फिलहाल सैन्य ऑपरेशन जारी रहने वाला है। पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देशों ने इस मध्यस्थता की पहल की है ताकि क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष को अस्थायी रूप से रोका जा सके। फिलहाल स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है और दोनों तरफ से कड़ी बयानबाजी का दौर जारी है।
सीज़फायर प्रस्ताव और मध्यस्थ देशों की भूमिका
पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शत्रुता को तुरंत रोकने के लिए एक विशेष ढांचा तैयार किया है। इस प्रस्ताव में तत्काल सीज़फायर और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने की मांग की गई है। यह एक दो-चरणीय समझौता है जिसका अंतिम लक्ष्य दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत शुरू करवाना है ताकि युद्ध को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस बातचीत की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
ईरान की प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति
- ईरान ने प्रस्ताव मिलने की पुष्टि की है लेकिन साफ कर दिया है कि वह केवल अस्थायी शांति के बदले रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्ग नहीं खोलेगा।
- राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार शाम 8 बजे तक की समय-सीमा तय की थी और समझौता न होने पर ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की चेतावनी दी थी।
- व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार जब तक राष्ट्रपति हस्ताक्षर नहीं करते, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी जारी रहेगा।
- ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की शर्तों और धमकियों को अतार्किक बताते हुए खारिज कर दिया है।
- हालिया घटनाक्रम में इजरायल द्वारा ईरान के दक्षिण पार्स पेट्रोकेमिकल संयंत्र पर हमला करने की खबरें भी सामने आई हैं।
प्रमुख पक्ष और शामिल देश
इस पूरे मामले में अमेरिका की ओर से व्हाइट हाउस और मध्य पूर्व के दूत स्टीव विटकॉफ सक्रिय हैं। वहीं ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और प्रवक्ता इस्माइल बाकाई मोर्चा संभाले हुए हैं। मध्यस्थता करने वाले देशों में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की शामिल हैं जो दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें ट्रंप की अगली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं जहाँ वे इस मुद्दे पर और अधिक जानकारी साझा कर सकते हैं।




