ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव को ठुकराया, कहा युद्ध हमेशा के लिए खत्म हो तभी बात बनेगी
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी खबर आई है। 6 अप्रैल 2026 को ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका के शांति प्रस्ताव पर अपना औपचारिक जवाब सौंप दिया है। ईरान ने इस प्रस्ताव में किसी भी तरह के अस्थाई युद्धविराम को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। ईरान की मांग है कि युद्ध को हमेशा के लिए खत्म किया जाए और उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को तुरंत हटाया जाए। यह जवाब ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर कड़ी चेतावनी दी हुई है।
ईरान ने बातचीत के लिए कौन सी शर्तें रखी हैं?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने स्पष्ट किया कि धमकियों और अल्टीमेटम के बीच बातचीत संभव नहीं है। ईरान ने अपनी मांगों की एक औपचारिक सूची तैयार की है जिसमें सुरक्षा और शांति को लेकर कड़े रुख अपनाए गए हैं। मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:
- क्षेत्रीय संघर्षों का पूरी तरह और स्थायी रूप से अंत होना चाहिए।
- ईरान पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाया जाए।
- होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए सुरक्षित आवाजाही के लिए एक पक्का प्रोटोकॉल तैयार किया जाए।
- युद्ध से हुए नुकसान के लिए पुनर्निर्माण की व्यवस्था और गारंटी दी जाए।
- ईरान को यह सुरक्षा गारंटी चाहिए कि उस पर भविष्य में दोबारा हमला नहीं किया जाएगा।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और वर्तमान कूटनीतिक स्थिति
पाकिस्तान इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए मुख्य मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर इस मामले में अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के साथ लगातार संपर्क में बने हुए हैं। पाकिस्तान ने इस्लामाबाद समझौते का एक प्रस्ताव दिया है, जिसमें पहले तुरंत युद्धविराम और फिर अगले 15 से 20 दिनों में बड़े मुद्दों पर समझौता करने की योजना थी। हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह केवल अस्थाई राहत के बदले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि उसे लगता है कि वाशिंगटन स्थायी शांति के लिए अभी तैयार नहीं है।




