Donald Trump Warning to Iran: ट्रंप ने ईरान को दी आखिरी चेतावनी, कहा समझौता नहीं हुआ तो ‘पत्थर युग’ में लौट जाएगा देश
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर बहुत बड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने 6 अप्रैल 2026 को अपने बयान में साफ कहा कि अगर ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं होता है, तो वह ‘पत्थर युग’ में वापस लौट जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के पास बातचीत के लिए अब बहुत ही कम समय बचा है और मंगलवार को वार्ता का आखिरी दिन माना जाएगा। ट्रंप ने कहा कि उनके पास एक प्रस्ताव है लेकिन वह काफी नहीं है और ईरान को कड़े फैसले लेने होंगे।
ट्रंप की चेतावनी का ईरान पर क्या असर होगा?
ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि समझौता नहीं होता है, तो ईरान के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने बिजली स्टेशनों और पुलों जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों को नष्ट करने की बात कही है। ट्रंप का मानना है कि ईरान में पिछले महीने हुई हिंसा और प्रदर्शनकारियों की मौत के कारण यह कड़ा रुख अपनाना जरूरी है। इस तनाव की वजह से पूरे खाड़ी क्षेत्र में हलचल बढ़ गई है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी ट्रंप ने मंगलवार शाम तक की डेडलाइन दी है।
ईरान ने ट्रंप की धमकी पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
ईरानी प्रशासन और सैन्य अधिकारियों ने ट्रंप के इस बयान का जोरदार विरोध किया है। ईरान की तरफ से आए बयानों में अमेरिका के इतिहास और ईरान की पुरानी सभ्यता का हवाला दिया गया है। मुख्य प्रतिक्रियाएं नीचे दी गई हैं:
- अब्बास अराक्छी (विदेश मंत्री): उन्होंने सवाल किया कि पत्थर युग में तेल और गैस नहीं होता था, तो क्या अमेरिका वास्तव में ऐसा भविष्य चाहता है।
- ईरानी सेना: सेना ने कहा है कि वे किसी भी हमले का जवाब और भी विनाशकारी कार्रवाई से देंगे।
- माजिद मूसावी: रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर ने कहा कि 250 साल के इतिहास वाला देश 6,000 साल पुरानी सभ्यता को खत्म करने की धमकी दे रहा है।
- ओमान के साथ चर्चा: ईरान फिलहाल ओमान के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में यातायात की निगरानी के लिए बातचीत कर रहा है।
जानकारों का मानना है कि ट्रंप की इस तरह की बयानबाजी से खाड़ी देशों में लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष शुरू हो सकता है। ब्रिटेन और फ्रांस सहित करीब 40 देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने के उपायों पर चर्चा कर रहे हैं। इस स्थिति का सीधा असर उन प्रवासियों पर पड़ सकता है जो खाड़ी देशों में रहते हैं या वहां की यात्रा करते हैं, क्योंकि समुद्री रास्तों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ेगा।



