Tehran University पर अमेरिका और इसराइल का हमला, बंकर बस्टर बम से गिरी इमारतें, 34 लोगों की मौत.
ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित मशहूर शरीफ यूनिवर्सिटी पर सोमवार 6 अप्रैल 2026 को अमेरिका और इसराइल ने जोरदार हमला किया है. इस हमले में यूनिवर्सिटी की रिसर्च बिल्डिंग्स और प्रयोगशालाओं को भारी नुकसान पहुँचा है. ईरान सरकार ने जानकारी दी है कि हमले में बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया है. इस हमले के बाद पूरे ईरान में तनाव का माहौल है और कई शहरों में पेट्रोल की किल्लत पैदा हो गई है क्योंकि पास के ही एक फ्यूल स्टेशन को निशाना बनाया गया था.
हमले के बाद ईरान में मौजूदा स्थिति कैसी है?
- ईरान की मीडिया के अनुसार इस हमले में अब तक देश भर में 34 लोगों की मौत हो चुकी है जिसमें 6 बच्चे भी शामिल हैं.
- तेहरान के पास एक फ्यूल स्टेशन को निशाना बनाने की वजह से स्थानीय इलाकों में ईंधन की भारी कमी हो गई है.
- ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतों में उछाल आया है.
- IAEA ने चेतावनी दी है कि कुछ हवाई हमले बुशहर परमाणु प्लांट के महज 75 मीटर की दूरी पर हुए हैं जो एक बड़ा खतरा है.
- ईरान के विदेश मंत्री ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया है और बदला लेने की बात कही है.
अमेरिका और इसराइल की तरफ से क्या बयान आया है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को मंगलवार शाम तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का अल्टीमेटम दिया है. ट्रम्प ने कहा है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान के पावर प्लांट और अन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है. वहीं इसराइल के रक्षा मंत्री ने पुष्टि की है कि उन्होंने ईरान के सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल ठिकानों पर हमले किए हैं. इसराइली सेना का दावा है कि उन्होंने इस हवाई हमले में ईरान के खुफिया प्रमुख मेजर जनरल माजिद खादेमी को भी मार गिराया है.
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर क्या होगा असर?
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते इस तनाव का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों पर पड़ सकता है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और ईंधन की कीमतों में अचानक तेजी आई है. इससे पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की संभावना है जो प्रवासियों के लिए रोजमर्रा का खर्चा और यात्रा को महंगा बना सकता है. जानकारों का कहना है कि अगर युद्ध और लंबा खिंचता है तो खाड़ी देशों से आने-जाने वाली उड़ानों के रूट में भी बदलाव हो सकता है जिससे हवाई किराया और सफर का समय बढ़ जाएगा.




