ईरान ने ट्रंप की धमकी को बताया ‘पागलपन’, कहा नागरिक ठिकानों पर हमला हुआ तो अंजाम होगा बहुत बुरा
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है। 6 अप्रैल 2026 को ईरान के सैन्य मुख्यालय Khatam al-Anbiya ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों का कड़ा जवाब दिया है। ईरान ने इन धमकियों को पूरी तरह बेकार और उनका भ्रम बताया है। ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका ने पावर प्लांट या पुलों जैसे नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया, तो पलटकर किया जाने वाला हमला बहुत ही भयानक और बड़े स्तर पर होगा।
ईरान ने ट्रंप की धमकियों पर क्या कहा है?
ईरान के सैन्य प्रवक्ता Ebrahim Zolfaghari ने कहा कि ट्रंप की बातें क्षेत्र में अमेरिका को मिली बेइज्जती और अपमान को कम नहीं कर पाएंगी। ईरान के मुताबिक, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पावर प्लांट और पुलों को उड़ाने की जो बात कही है, वह उनकी हताशा को दिखाती है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे और दुश्मनों के लिए इस पूरे इलाके को नर्क बना देंगे। उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने इन धमकियों को सीधे तौर पर युद्ध अपराध और संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन बताया है।
इस विवाद से जुड़ी मुख्य बातें और ताज़ा अपडेट
ईरान और अमेरिका के बीच यह टकराव ट्रंप की उस सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ जिसमें उन्होंने ईरान को मंगलवार तक की समयसीमा दी थी। मामले से जुड़ी जरूरी जानकारी नीचे दी गई है:
| मुख्य विषय | विवरण |
|---|---|
| ट्रंप की धमकी | ईरान के पावर प्लांट और पुलों जैसे नागरिक ठिकानों पर हमला करने की बात कही। |
| ईरान का दावा | अमेरिकी सेना ने इसफ़हान (Isfahan) में एक नाकाम ऑपरेशन के बाद खुद अपने उपकरणों को नष्ट किया। |
| सख्त चेतावनी | अगर दोबारा हमला हुआ तो ईरान का जवाबी हमला बहुत ज्यादा विनाशकारी होगा। |
| कानूनी पक्ष | ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन बताया है। |
| हॉर्मुज जलडमरूमध्य | ट्रंप ने इस रास्ते को फिर से खोलने के लिए ईरान को अल्टीमेटम दिया था। |
ईरान ने उन दावों को भी गलत बताया है जिसमें कहा गया था कि ईरान के राष्ट्रपति शांति समझौते या युद्धविराम की कोशिश कर रहे हैं। ईरान की सेना का कहना है कि वे किसी भी तरह के दबाव में नहीं आएंगे और अपनी सीमाओं की रक्षा करेंगे। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के लिए यह खबर चिंता का विषय है क्योंकि इस तनाव का असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और शांति पर पड़ सकता है।




