US Central Command का बड़ा हमला, ईरान के 13000 ठिकानों को किया तबाह, ट्रंप ने दी कल तक की मोहलत.
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब विनाशकारी मोड़ ले चुका है। US Central Command (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि ‘Operation Epic Fury’ के तहत अब तक ईरान के 13,000 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं। 28 फरवरी से शुरू हुई इस बड़ी कार्रवाई का मकसद ईरान के मिसाइल सिस्टम और उसकी नौसेना की ताकत को पूरी तरह खत्म करना है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर मंगलवार 7 अप्रैल तक समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के पूरे बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया जाएगा।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और अब तक की सैन्य कार्रवाई का विवरण
अमेरिकी सेना की इस कार्रवाई में अब तक कई बड़े लक्ष्यों को निशाना बनाया गया है। एडमिरल ब्रॉड कूपर के अनुसार, अमेरिकी सेना पूरी तरह से ईरान की हमला करने की क्षमता को खत्म करने पर ध्यान दे रही है। इस मिशन के दौरान हुई मुख्य घटनाएं इस प्रकार हैं:
- हमलों की शुरुआत: 28 फरवरी 2026 को रात 1:15 बजे ऑपरेशन शुरू हुआ।
- कुल टारगेट: 6 अप्रैल तक 13,000 से अधिक ठिकानों को सफलतापूर्वक हिट किया गया।
- अमेरिकी नुकसान: अभी तक किसी अमेरिकी सैनिक के मारे जाने या गंभीर घायल होने की खबर नहीं है।
- रेस्क्यू ऑपरेशन: 2 अप्रैल को ईरान के भीतर गिरे अमेरिकी F-15E विमान के दो क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया गया है।
खाड़ी देशों और कुवैत पर ईरान के हमलों का असर
ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में पड़ोसी देशों और इसराइल पर मिसाइल और ड्रोन दागे हैं। कुवैत न्यूज़ एजेंसी (KUNA) के अनुसार, कुवैत में हुए ड्रोन हमलों ने वहां की बिजली और पानी की व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है। इस युद्ध का असर खाड़ी में रह रहे प्रवासियों और स्थानीय लोगों पर भी पड़ रहा है:
| प्रभावित क्षेत्र | नुकसान का विवरण |
|---|---|
| कुवैत | दो बिजली उत्पादन यूनिट बंद और पानी के प्लांट को नुकसान |
| इसराइल | ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा |
| ईरानी सुरक्षा तंत्र | मिसाइल उत्पादन और नौसेना के ठिकानों पर भारी बमबारी |
| गल्फ देश | सऊदी, UAE और कतर में स्थित अमेरिकी बेस हाई अलर्ट पर |
सेक्रेटरी ऑफ वॉर पीट हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिका ईरान पर बहुत ही सटीक और आक्रामक तरीके से हमला कर रहा है। अमेरिका अपनी ताकत को और मजबूत कर रहा है जबकि ईरान की रक्षात्मक क्षमता लगातार कमजोर होती जा रही है। अब सबकी नजरें 7 अप्रैल की डेडलाइन पर टिकी हैं क्योंकि इसके बाद युद्ध और भयानक रूप ले सकता है।




