Iran Nuclear Plant Attack: ईरान के न्यूक्लियर प्लांट के पास गिरा मिसाइल, IAEA ने दी चेतावनी, रेडिएशन फैलने का बढ़ा खतरा.
ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के बेहद करीब हुए हवाई हमलों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने पुष्टि की है कि इसराइल और अमेरिका के हमलों में एक मिसाइल प्लांट की बाउंड्री से मात्र 75 मीटर की दूरी पर गिरी है। हालांकि प्लांट के मुख्य हिस्से को सीधा नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन पास की एक इमारत क्षतिग्रस्त हुई है और एक सुरक्षाकर्मी की जान चली गई है।
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इस हमले से जुड़ी मुख्य बातें क्या हैं और IAEA ने क्या कहा?
IAEA के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रोसी ने कहा है कि परमाणु केंद्र के इतने करीब सैन्य गतिविधि होना बहुत खतरनाक है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मुख्य प्लांट को नुकसान पहुंचता है, तो यह चेर्नोबिल से भी बड़ी तबाही ला सकता है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि यह हमला शनिवार, 4 अप्रैल 2026 को हुआ था। हमलों के बाद प्लांट से रूस के लगभग 198 कर्मचारियों को बाहर निकाला गया है, जबकि कुछ स्टाफ अभी भी वहां मौजूद है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| हमले की जगह | बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट, ईरान |
| मिसाइल की दूरी | मुख्य दीवार से सिर्फ 75 मीटर दूर |
| जानी नुकसान | 1 सुरक्षा कर्मचारी की मौत |
| पुष्टि की तारीख | 6 अप्रैल 2026 (IAEA द्वारा) |
| रेडिएशन लेवल | फिलहाल कोई रिसाव नहीं मिला है |
खाड़ी देशों और वहां रहने वाले प्रवासियों पर क्या असर होगा?
ईरान के विदेश मंत्री ने इस हमले के बाद एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर परमाणु रिसाव होता है, तो इसका असर केवल ईरान पर नहीं बल्कि खाड़ी देशों (GCC) की राजधानियों पर भी पड़ेगा। खाड़ी देशों जैसे कुवैत, दुबई और कतर में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि समुद्री हवाओं के साथ रेडियोधर्मी तत्व आसपास के देशों तक बहुत जल्दी पहुँच सकते हैं। WHO ने भी इस स्थिति को लेकर अपनी गहरी चिंता जताई है और कहा है कि परमाणु केंद्रों को कभी भी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
- परमाणु ईंधन: प्लांट के अंदर भारी मात्रा में परमाणु ईंधन मौजूद है, जो फटने पर हवा को जहरीला बना सकता है।
- रूस की भूमिका: रूसी विशेषज्ञ इस प्लांट को चलाने में मदद करते हैं, उन्होंने भी हमलों को रोकने की अपील की है।
- प्रवासियों पर असर: रेडिएशन फैलने की स्थिति में खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों की सेहत और जीवन पर सीधा संकट आ सकता है।
- IAEA की मांग: एजेंसी ने सभी पक्षों से परमाणु सुरक्षा के नियमों का पालन करने को कहा है।




