इसराइल ने लेबनान में बढ़ाया जमीनी हमला, हिज़बुल्लाह के लड़ाकों को मारने का दावा, 1400 से ज्यादा लोगों की गई जान
इसराइल की सेना ने दक्षिणी लेबनान में अपनी जमीनी कार्रवाई को और अधिक तेज कर दिया है और दावा किया है कि उन्होंने हिज़बुल्लाह के कई लड़ाकों को मार गिराया है. 7 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, इसराइली सेना लेबनान के इलाकों में काफी अंदर तक घुस चुकी है. इस जंग की वजह से लेबनान में अब तक 1400 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 10 लाख से ज्यादा लोग अपना घर छोड़कर भागने पर मजबूर हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की तरफ बढ़ रही है.
युद्ध में अब तक की बड़ी घटनाएं और नुकसान
लेबनान और इसराइल के बीच चल रहे इस संघर्ष में आम लोगों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है. 6 और 7 अप्रैल को हुए हमलों में कई लोगों की मौत हुई है और राहत टीमों को भी निशाना बनाया गया है. पिछले कुछ दिनों के आंकड़े नीचे दिए गए हैं:
| घटना का प्रकार | विवरण |
|---|---|
| कुल मौतें | 2 मार्च से अब तक 1400 से ज्यादा लोग मारे गए |
| विस्थापन | 10 लाख से ज्यादा लेबनानी नागरिक बेघर हुए |
| 6 अप्रैल का हमला | दक्षिणी लेबनान में 5 लोगों की मौत और 7 घायल |
| पत्रकारों की मौत | 28 मार्च को 3 लेबनानी पत्रकारों की जान गई |
| शांति सैनिक | इंडोनेशिया के 3 UNIFIL शांति सैनिकों की मौत हुई |
हिज़बुल्लाह और इसराइल की सैन्य कार्रवाई की ताज़ा स्थिति
हिज़बुल्लाह ने भी इसराइली हमलों का जवाब देते हुए 7 अप्रैल को करीब 44 हमले करने का दावा किया है. इसमें इसराइली सेना के ठिकानों, सैनिकों और टैंकों को निशाना बनाया गया है. दूसरी तरफ इसराइल का मकसद Litani River तक के इलाके पर कब्जा करना है ताकि हिज़बुल्लाह को वहां से हटाया जा सके. इसराइल ने लितानी नदी पर बने 5 मुख्य पुलों को भी तोड़ दिया है ताकि दक्षिणी लेबनान का संपर्क बाकी हिस्सों से काटा जा सके.
इसराइली रक्षा मंत्री Israel Katz ने साफ कहा है कि जब तक हिज़बुल्लाह का खतरा खत्म नहीं होता, यह अभियान जारी रहेगा और लेबनान के विस्थापित लोगों को तब तक वापस नहीं आने दिया जाएगा. वहीं लेबनान की सरकार ने हिज़बुल्लाह की सैन्य गतिविधियों को अवैध बताते हुए उन्हें हथियार डालने की मांग की है. ईरान ने फिलहाल अमेरिका के साथ युद्धविराम के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और हमले बंद करने की शर्त रखी है.




