ईरान ने अमेरिका और इसराइल पर लगाया यूनिवर्सिटी तबाह करने का आरोप, UN से की कड़ी कार्रवाई की मांग.
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने अमेरिका और इसराइल की सैन्य कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है। ईरान का कहना है कि उसकी यूनिवर्सिटीज़ को निशाना बनाना सीधे तौर पर आम नागरिकों और शिक्षा संस्थानों पर हमला है। इस विवाद के बीच ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइलें दागी हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव काफी बढ़ गया है।
हमले में किन संस्थानों को पहुँचा है नुकसान?
ईरान की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, 6 अप्रैल 2026 को Sharif University of Technology पर हमला किया गया था। इस हमले में यूनिवर्सिटी के कई रिसर्च सेंटर्स और इंजीनियरिंग विभागों को भारी नुकसान हुआ है। इसके पहले 3 अप्रैल को भी एक अन्य बड़े संस्थान को निशाना बनाया गया था।
| संस्थान का नाम | नुकसान का विवरण |
|---|---|
| Sharif University of Technology | सिविल इंजीनियरिंग और नैनो रिसर्च इंस्टीट्यूट की इमारतें क्षतिग्रस्त हुई |
| Shahid Beheshti University | लेज़र और प्लाज्मा रिसर्च इंस्टीट्यूट को भारी नुकसान पहुँचा |
| सिविलियन टारगेट | ईरानी रेड क्रेसेंट के अनुसार कुल 17 नागरिक ठिकानों पर हमला हुआ |
ईरान की UN से मांग और वर्तमान हालात
ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि इन हमलों को युद्ध अपराध और सरकारी आतंकवाद माना जाए। ईरान ने चेतावनी दी है कि शिक्षा संस्थानों पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के लिए यह खबर चिंता का विषय है क्योंकि तनाव बढ़ने से क्षेत्र की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
- ईरान ने UN से इस मामले में दोषियों की जवाबदेही तय करने की अपील की है।
- UN महासचिव ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।
- ईरान की Revolutionary Guard (IRGC) ने मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी संस्थानों को निशाना बनाने की बात कही है।
- 7 अप्रैल को ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इसराइल की ओर मिसाइलें दागी हैं।
- हमलों के बाद से यूनिवर्सिटी कैंपस में मलबे के बीच ईरानी झंडे की तस्वीरें सामने आई हैं।




