ट्रंप की ईरान को आखिरी चेतावनी, आज रात 8 बजे तक समझौता नहीं हुआ तो होगी बड़ी कार्रवाई, दुनिया की नजरें डेडलाइन पर टिकी
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब अपने सबसे नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है. व्हाइट हाउस ने अपनी रणनीति बदलते हुए अब ईरान के साथ किसी भी समझौते के लिए एक सख्त समय सीमा तय कर दी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज यानी 7 अप्रैल 2026 की रात 8 बजे तक का समय दिया है, जिससे खाड़ी देशों और दुनिया भर में हलचल बढ़ गई है. अगर यह समय सीमा निकल जाती है, तो खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोगों और वहां के व्यापार पर इसका गहरा असर पड़ सकता है.
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समझौता न होने पर क्या कदम उठा सकता है अमेरिका
व्हाइट हाउस की ओर से जानकारी दी गई है कि राष्ट्रपति ट्रंप का रुख अब काफी सख्त हो गया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर तय समय तक समझौता नहीं हुआ और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से नहीं खोला गया, तो ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और पुलों को निशाना बनाया जा सकता है. राष्ट्रपति ने कहा है कि उनकी सेना एक ही रात में ईरान को भारी नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखती है. हालांकि प्रशासन के कुछ अधिकारियों का मानना है कि अगर बातचीत में सुधार दिखता है, तो सैन्य कार्रवाई को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है, लेकिन अंतिम फैसला केवल राष्ट्रपति ट्रंप ही लेंगे. अमेरिका ने साफ किया है कि वह इस मामले में किसी भी तरह के परमाणु हथियार का उपयोग नहीं करेगा और ऐसी खबरें पूरी तरह गलत हैं.
ईरान की मांगें और बातचीत की ताजा स्थिति
ईरान ने अमेरिका के सामने 10 सूत्रीय जवाबी प्रस्ताव रखा है जिसमें उन्होंने अस्थायी युद्धविराम को साफ तौर पर खारिज कर दिया है. ईरान की मांग है कि उन पर लगे सभी प्रतिबंध हटाए जाएं और युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने की गारंटी दी जाए. बातचीत के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश सक्रिय हैं जो दोनों देशों के बीच सुलह कराने की कोशिश कर रहे हैं. वर्तमान में एक दो-चरणीय समझौते पर चर्चा हो रही है जिसमें पहले 45 दिनों के युद्धविराम का प्रस्ताव है, ताकि स्थायी शांति का रास्ता खुल सके. लेकिन ईरान का कहना है कि वे किसी भी तरह की धमकी के दबाव में बातचीत नहीं करेंगे.
| जरूरी जानकारी | विवरण |
|---|---|
| डेडलाइन का समय | 7 अप्रैल 2026, रात 8:00 बजे (ET) |
| मुख्य अमेरिकी नेता | डोनाल्ड ट्रंप, जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर |
| ईरानी अधिकारी | अब्बास अराक्छी, मोहम्मद बाकर कलीबाफ |
| मध्यस्थता करने वाले देश | पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की, ओमान |
| संभावित खतरे | ईरान के पुल और पावर प्लांट पर हमला |
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से तेल की कीमतों और सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें आज रात होने वाले फैसले पर टिकी हैं कि युद्ध टलेगा या स्थिति और बिगड़ेगी.




