Strait of Hormuz में जहाजों से वसूला जाएगा भारी टैक्स, ईरान और ओमान के बीच हुआ नया समझौता, अब देना होगा करोड़ों का शुल्क.
खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीज़फायर यानी युद्धविराम पर सहमति बनी है। इस नए प्लान के तहत अब Strait of Hormuz से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों को भारी टैक्स देना होगा। ईरान और ओमान इस रास्ते से निकलने वाले जहाजों से फीस वसूलेंगे जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है।
सीज़फायर प्लान के तहत अब कितना लगेगा पैसा?
- ईरान और ओमान अब Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट फीस वसूल सकेंगे।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक एक जहाज के लिए यह फीस लगभग 2 मिलियन डॉलर यानी करीब 16 करोड़ रुपये से ज़्यादा हो सकती है।
- ईरान इस पैसे का इस्तेमाल अपने देश में हुए नुकसान के बाद पुनर्निर्माण के कामों में करेगा।
- ओमान इस पैसे का क्या इस्तेमाल करेगा, इसके बारे में अभी कोई जानकारी साझा नहीं की गई है।
- अधिकारियों के अनुसार यह जलमार्ग ईरान और ओमान दोनों के समुद्री इलाके में आता है।
क्या है इस नए नियम का अंतरराष्ट्रीय असर?
Strait of Hormuz दुनिया का एक बहुत ही महत्वपूर्ण जलमार्ग है जहां से दुनिया का सबसे ज़्यादा तेल व्यापार होता है। अब तक इस रास्ते को अंतरराष्ट्रीय पानी माना जाता था और यहां से गुजरने के लिए कोई फीस नहीं देनी पड़ती थी। ईरान की संसद ने इसके लिए मार्च 2026 के अंत में ही कानून पास कर दिया था। हालांकि अंतरराष्ट्रीय कानून (UNCLOS) के तहत ऐसे रास्तों पर फीस लेना मना है, लेकिन ईरान का कहना है कि वह इन नियमों को मानने के लिए बाध्य नहीं है।
कब से शुरू होगी नई व्यवस्था और क्या है अपडेट?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस दो हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा बुधवार 8 अप्रैल 2026 को की है। शुक्रवार से इस्लामाबाद में इस विषय पर विस्तार से बातचीत शुरू होगी। फरवरी के अंत से यह रास्ता व्यापारिक जहाजों के लिए लगभग बंद था, जिसे अब फिर से खोलने की तैयारी है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह खबर ज़रूरी है क्योंकि इससे आने वाले समय में आयात होने वाले सामानों की कीमतों पर असर पड़ सकता है।




