ईरान ने फिर दागा, सीजफायर के बाद भी कुवैत और UAE पर ड्रोन और मिसाइल अटैक, तेल ठिकानों को पहुंचा भारी नुकसान.
खाड़ी देशों में शांति की कोशिशों के बीच ईरान ने एक बार फिर बड़ी हलचल मचा दी है। 8 अप्रैल 2026 को कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों से हमला किया गया। यह हमला उस समय हुआ जब हाल ही में अमेरिका, ईरान और इसराइल के बीच दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बनी थी। इस हमले से पूरे क्षेत्र में तनाव फिर से बढ़ गया है और कई जगहों पर नुकसान की खबरें आई हैं।
UAE और कुवैत में हमलों से क्या नुकसान हुआ?
UAE के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ओर से आ रही कई मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही रोक दिया। मलबे की चपेट में आने से अबू धाबी के मुसाफ्फा इलाके में रहने वाले एक विदेशी नागरिक को मामूली चोटें आई हैं। वहीं कुवैत में ईरानी ड्रोनों ने बिजली और पानी के प्लांट को निशाना बनाया जिससे काफी संपत्ति का नुकसान हुआ है। नीचे दी गई टेबल में हमलों का ब्योरा है:
| देश | नुकसान और स्थिति |
|---|---|
| UAE | अबू धाबी में गैस प्लांट में आग और मुसाफ्फा में एक घायल। |
| कुवैत | तेल ठिकानों और बिजली स्टेशनों को भारी सामग्री नुकसान। |
| कुवैत आर्मी | 31 में से 28 ईरानी ड्रोनों को मार गिराने का दावा। |
सीजफायर के बाद भी हमला क्यों?
7 अप्रैल को ही ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम का समझौता हुआ था। समझौते के तहत ईरान को हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने के लिए कहा गया था। इस हमले को समझौते का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत शुरू होने वाली थी, लेकिन अब इन हमलों के बाद शांति वार्ता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। खाड़ी में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह चिंता की बात है क्योंकि तेल और बिजली ठिकानों पर हमले से रोजमर्रा की सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया और प्रवासी असर
सऊदी अरब, कतर और बहरीन ने इस हमले की निंदा की है और कुवैत के साथ खड़े होने की बात कही है। कुवैत ने फिर से दोहराया है कि वह किसी भी युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहता और अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी देश के खिलाफ नहीं होने देगा। वहां रह रहे प्रवासियों को सलाह दी गई है कि वे स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। हमलों के कारण कुछ इलाकों में बिजली और पानी की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है जिसे ठीक करने की कोशिशें जारी हैं।




