Israel-Lebanon Conflict: लेबनान पर इसराइल के हमले से बिगड़े हालात, ईरान ने दी शांति वार्ता से हटने की चेतावनी.
पश्चिम एशिया में शांति समझौते को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है. इसराइल की ओर से लेबनान में किए गए भारी हमलों के बाद ईरान ने अमेरिका और इसराइल पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है. ईरान ने साफ कहा है कि अगर हमले नहीं रुके तो वह इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत से पीछे हट सकता है. इस विवाद की वजह से पूरे इलाके में युद्ध का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है और आम लोगों के बीच डर का माहौल बना हुआ है.
शांति समझौते को लेकर इसराइल और ईरान के बीच क्या है विवाद?
मुख्य विवाद इस बात पर है कि युद्धविराम के नियम कहां-कहां लागू होते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि लेबनान और हिजबुल्लाह इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं. वहीं ईरान और पाकिस्तान का मानना है कि युद्धविराम पूरे क्षेत्र के लिए होना चाहिए. इसी मतभेद के कारण इसराइल ने लेबनान में बेरूत और बेका घाटी समेत 100 से ज्यादा जगहों पर बमबारी की है, जिसमें सैकड़ों लोग हताहत हुए हैं. ईरान ने इसके जवाब में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया है जिससे समुद्री व्यापार पर असर पड़ने की संभावना है.
ईरान ने समझौते के उल्लंघन में किन बड़ी बातों का जिक्र किया?
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालबाफ ने अमेरिका और इसराइल पर तीन मुख्य नियमों को तोड़ने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि ऐसी स्थिति में बातचीत करना अब संभव नहीं लग रहा है. इन आरोपों ने इस्लामाबाद में होने वाली आगामी बैठक पर सवालिया निशान लगा दिया है.
- लेबनान में इसराइल की तरफ से लगातार सैन्य हमले किए जा रहे हैं.
- ईरान के फार्स प्रांत की हवाई सीमा में एक बाहरी ड्रोन का अवैध प्रवेश हुआ है.
- ईरान को यूरेनियम संवर्धन के उसके अधिकार से वंचित करने की कोशिश की जा रही है.
- पाकिस्तान इस मामले में मध्यस्थता कर रहा है और उसने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है.
अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर समुद्री रास्ता नहीं खोला गया तो वह समझौते की शर्तों को नहीं मानेगा. लेबनान सरकार ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है. विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्षों के बीच शर्तों पर असहमति के कारण यह शांति समझौता केवल एक अस्थाई रुकावट बनकर रह गया है.




