अमेरिका ने यूरोपीय देशों से मांगा प्लान, हॉर्मुज समुद्री रास्ते में जहाजों की सुरक्षा के लिए दिए कुछ दिन
अमेरिका ने यूरोपीय देशों से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अगले कुछ दिनों के भीतर विस्तृत योजना पेश करने को कहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, वॉशिंगटन का यह कदम क्षेत्र में तनाव कम करने और तेल की सप्लाई को फिर से बहाल करने की कोशिशों का हिस्सा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की थी, जिसके तहत ईरान तेल और गैस की सप्लाई में बाधा नहीं डालने पर सहमत हुआ है।
युद्धविराम की शर्तें और किन देशों के बीच हुई बातचीत
ईरान और अमेरिका के बीच यह समझौता पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद संभव हुआ है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने साफ किया है कि यदि ईरान पर हमले बंद होते हैं, तो वे जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए तैयार हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी अन्य अंतरराष्ट्रीय पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने की बात कही है। इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए कई बड़े देश एक साथ आए हैं।
| प्रमुख भागीदार | शामिल देश और संस्थाएं |
|---|---|
| प्रस्तावक | संयुक्त राज्य अमेरिका (Washington) |
| सहयोगी देश | यूके, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा, डेनमार्क, नीदरलैंड, स्पेन और जापान |
| मध्यस्थ | पाकिस्तान (प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ) |
| क्षेत्रीय पक्ष | ईरान (Foreign Minister Abbas Araqchi) |
| यूरोपीय संस्थाएं | यूरोपीय आयोग और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष |
बाजार और तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे विवाद और सुरक्षा चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। प्रवासियों और खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर उनकी जेब पर पड़ता है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि युद्धविराम तभी पूरी तरह प्रभावी माना जाएगा जब यह समुद्री रास्ता जहाजों के लिए पूरी तरह खुल जाएगा।
- ईरान ने समुद्री सुरंगों (Mines) से बचने के लिए दो सुरक्षित रास्ते बनाने का ऐलान किया है।
- एशियाई शेयर बाजारों में फिलहाल गिरावट देखी जा रही है क्योंकि निवेशकों को युद्धविराम की स्थिरता पर संदेह है।
- ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि जल्द ही इस्लामाबाद में सीधी बातचीत कर सकते हैं।
- अभी तक किसी भी बड़े तेल टैंकर ने युद्धविराम शुरू होने के बाद से इस रास्ते को पार नहीं किया है।





