Strait of Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते का युद्धविराम, खुल गया तेल सप्लाई का सबसे बड़ा रास्ता.
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 39 दिनों से चल रही जंग पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल 2026 से दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बनी है। इस समझौते का सबसे अहम हिस्सा Strait of Hormuz को दोबारा खोलना है, जिससे दुनिया भर में जारी तेल संकट को कम किया जा सके। राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पष्ट किया है कि यदि नियमों का पालन नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है।
इस शांति समझौते की मुख्य शर्तें और नियम क्या हैं?
इस समझौते के तहत ईरान को Strait of Hormuz को पूरी तरह सुरक्षित और तुरंत खोलना होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कहा है कि उनकी सेना तब तक वहां मौजूद रहेगी जब तक ईरान अपनी बातों को पूरी तरह नहीं मानता। अमेरिका की मुख्य मांग यह है कि ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और समुद्री रास्ता व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित रहना चाहिए। दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री का कहना है कि वे अपनी सेना के साथ तालमेल बिठाकर जहाजों को रास्ता देने के लिए तैयार हैं।
मौजूदा स्थिति और तनाव के मुख्य कारण क्या हैं?
9 अप्रैल को मिली ताज़ा जानकारी के अनुसार सीजफायर की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं, जिन्हें नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है:
| महत्वपूर्ण पक्ष | वर्तमान स्थिति और बयान |
|---|---|
| अमेरिका | होर्मुज का सुरक्षित खुलना अनिवार्य है, तभी बमबारी रुकी रहेगी। |
| ईरान | लेबनान में इजरायली हमले जारी रहे तो समझौता टूट सकता है। |
| पाकिस्तान | 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच अगली बातचीत होगी। |
| IMO | समुद्र में फंसे 20,000 से अधिक नाविकों की सुरक्षा का इंतज़ाम जारी। |
- ईरान ने इजरायल के लेबनान हमलों को सीजफायर का उल्लंघन बताया है।
- UN ने चेतावनी दी है कि लेबनान में जारी हिंसा से यह शांति समझौता खतरे में पड़ सकता है।
- खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए यह राहत की खबर है क्योंकि तेल संकट कम होने से बाज़ार में स्थिरता आएगी।
- पाकिस्तान ने शांति वार्ता के लिए अपनी राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है।
हालांकि ईरान की मीडिया में समुद्री रास्ता फिर से बंद करने की खबरें आई थीं, लेकिन व्हाइट हाउस ने इन खबरों को गलत बताया है। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए समुद्री रास्ते का खुला रहना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी रूट से भारत का अधिकांश कच्चा तेल आता है और वहां के हालात सीधे तौर पर क्षेत्र में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं।




