गाजा में रोटी का गंभीर संकट, बेकरियों पर 50% गिरा उत्पादन, घंटों लंबी लाइनों में खड़े हैं लोग.
गाजा में अमेरिकी मध्यस्थता वाले युद्धविराम को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन वहां रोटी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। इजरायली प्रतिबंधों के कारण आटे, ईंधन और नकद पैसों की भारी कमी हो गई है, जिससे आम लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। मानवीय संगठनों की रिपोर्ट बताती है कि बेकरियां अब मांग की तुलना में केवल आधी रोटी ही बना पा रही हैं। परिवारों को रोटी के लिए खराब मौसम में भी घंटों तक लाइनों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।
रोटी की कीमतों और उत्पादन पर क्या असर पड़ा है?
आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि गाजा में रोटी के उत्पादन में 30 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है। स्थिति इतनी खराब है कि रोटी की कीमतों में 400 प्रतिशत तक का उछाल देखा गया है। इसके अलावा नकद पैसों की कमी, खासकर छोटे सिक्कों की किल्लत के कारण लोग चाहकर भी राशन नहीं खरीद पा रहे हैं। इजरायल द्वारा क्रॉसिंग पर लगाई गई पाबंदियों की वजह से नकद पैसे गाजा के भीतर नहीं पहुंच पा रहे हैं। बेकरियों को चलाने के लिए जरूरी तेल और मशीनरी के हिस्से भी नहीं मिलने से कामकाज ठप हो रहा है।
मानवीय सहायता और जमीनी हकीकत क्या है?
| प्रमुख जानकारी | विवरण |
|---|---|
| प्रभावित जनसंख्या | 1.6 मिलियन (कुल आबादी का 77%) लोग खाद्य असुरक्षा का शिकार हैं |
| सहायता की स्थिति | UNRWA के 4,000 ट्रक खाना और आटा लेकर प्रवेश का इंतजार कर रहे हैं |
| मुख्य चुनौतियां | ईंधन की कमी, नकद संकट और इजरायली सीमा प्रतिबंध |
| संगठनों की राय | शांति योजना नागरिक सुरक्षा और सहायता पहुंचाने में विफल रही है |
मानवीय संगठनों जैसे सेव द चिल्ड्रन और ऑक्सफैम ने चेतावनी दी है कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इजरायल द्वारा अंतरराष्ट्रीय एनजीओ पर लगाए गए नए नियमों के कारण डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (MSF) जैसी संस्थाओं को भी काम करने में दिक्कत आ रही है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का कहना है कि मानवीय जरूरतें उपलब्ध सहायता की तुलना में बहुत ज्यादा हैं और मौजूदा व्यवस्था राहत पहुंचाने के लिए पर्याप्त नहीं है।




