President Murmu News: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने CAPF बिल 2026 को दी मंजूरी, अब देश में लागू हुआ नया कानून, बदल जाएंगे सुरक्षा बलों के नियम.
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार 9 अप्रैल 2026 को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक अब आधिकारिक तौर पर कानून बन गया है। सरकार ने इसे गजट में भी प्रकाशित कर दिया है जिससे यह कानून तुरंत प्रभावी हो गया है। इस नए कानून के जरिए अब CRPF, BSF और CISF जैसे बड़े सुरक्षा बलों में अधिकारियों की भर्ती और प्रमोशन की प्रक्रिया में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
इस नए कानून के तहत कौन से सुरक्षा बल शामिल हैं?
यह नया कानून मुख्य रूप से देश के पांच प्रमुख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) पर लागू होगा। इसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) को शामिल किया गया है। केंद्र सरकार के पास यह अधिकार होगा कि वह आने वाले समय में इसमें अन्य बलों को भी जोड़ सकती है। इस कानून के जरिए ग्रुप ए के जनरल ड्यूटी अधिकारियों की सेवा शर्तों को एक समान बनाया जाएगा ताकि प्रशासनिक कार्यों में कोई दिक्कत न आए।
IPS अधिकारियों और प्रमोशन को लेकर क्या हैं नए नियम?
नए कानून में IPS अधिकारियों के लिए बड़े पदों पर स्पष्ट कोटा तय किया गया है। इसके अनुसार, डायरेक्टर जनरल (DG) और स्पेशल डायरेक्टर जनरल (SDG) के सभी पद IPS अधिकारियों के लिए होंगे। इंस्पेक्टर जनरल (IG) के 50 प्रतिशत पद और एडिशनल डायरेक्टर जनरल (ADG) के कम से कम 67 प्रतिशत पदों पर भी IPS अधिकारी ही नियुक्त किए जाएंगे। इसके अलावा सेना के अधिकारियों को भी जरूरत पड़ने पर इन बलों में डेप्युटेशन पर लाया जा सकेगा। अधिकारियों के पुराने वित्तीय लाभ तब तक जारी रहेंगे जब तक नए नियम पूरी तरह लागू नहीं हो जाते।
CAPF कानून 2026 से जुड़े मुख्य आंकड़े और तारीखें
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| राज्यसभा में पेश किया गया | 25 मार्च 2026 |
| लोकसभा में पास हुआ | 2 अप्रैल 2026 |
| राष्ट्रपति की मंजूरी मिली | 9 अप्रैल 2026 |
| अधिकारी रैंक | असिस्टेंट कमांडेंट और उससे ऊपर |
| मुख्य उद्देश्य | भर्ती और सेवा शर्तों में एकरूपता लाना |
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के अनुसार यह बिल भारत की आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत करेगा। हालांकि, विपक्ष के कुछ नेताओं ने इस पर चिंता जताई है कि इससे सुरक्षा बलों के अपने कैडर के अधिकारियों के मनोबल पर असर पड़ सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून अदालती फैसलों और प्रशासनिक आदेशों के बीच के अंतर को खत्म करने और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लाया गया है।




