Saudi पर ईरान का बड़ा हमला, तेल पाइपलाइन और रिफाइनरी को पहुंचाया भारी नुकसान, सप्लाई में आई बड़ी गिरावट
ईरान से जुड़े हमलों ने सऊदी अरब के तेल और गैस नेटवर्क को बुरी तरह प्रभावित किया है। अप्रैल 2026 में हुए इन हमलों की वजह से तेल के उत्पादन और निर्यात में बड़ी गिरावट आई है। रियाद, यनबू और ईस्टर्न प्रोविंस जैसे अहम इलाकों में तेल प्लांट, रिफाइनरी और पावर फैसिलिटीज़ को निशाना बनाया गया। इन घटनाओं से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता बढ़ गई है और वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव आ गया है।
हमलों में कहां-कहां हुआ नुकसान और क्या रहा असर?
इन हमलों में सबसे ज्यादा चोट ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को पहुंची है, जो सऊदी अरब के लिए रेड सी के रास्ते तेल भेजने का मुख्य जरिया है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि एक पंपिंग स्टेशन को भारी नुकसान हुआ है, जिससे रोजाना करीब 700,000 बैरल तेल का प्रवाह कम हो गया है। यह सऊदी के कुल निर्यात का लगभग 10% हिस्सा है।
| निशाना बनाया गया स्थान | नुकसान का विवरण |
|---|---|
| ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन | 7,00,000 बैरल प्रतिदिन की सप्लाई बाधित |
| मनीफा और खुरैस ऑयल फील्ड्स | 3,00,000 बैरल प्रतिदिन उत्पादन में कमी |
| जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स | मिसाइल हमला, जोरदार धमाके और आग |
| रास तनुरा रिफाइनरी | ड्रोन हमले से प्रभावित |
| मानवीय क्षति | 1 व्यक्ति की मौत और 7 लोग घायल |
ईरान के दावे और अंतरराष्ट्रीय स्थिति क्या है?
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन मिसाइल और ड्रोन हमलों की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने यनबू में अमेरिकी कंपनियों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है। वहीं ईरान के सैन्य मुख्यालय ने दावा किया कि इजरायल सऊदी अरब में झूठे हमले (फाल्स फ्लैग ऑपरेशन) की योजना बना रहा था ताकि दोष ईरान पर मढ़ा जा सके।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की घोषणा के बावजूद ये हमले जारी रहे। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थता करने की कोशिश की। फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को IRGC द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है, जिससे व्यापारिक रूट पर असर पड़ा है।




