ईरान में अमेरिका-इजरायल हमले से मची तबाही, 1.25 लाख से ज्यादा नागरिक ठिकाने तबाह, अस्पताल और स्कूल भी चपेट में
अमेरिका और इजरायल के हमलों ने ईरान में आम लोगों की ज़िंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। Iranian Red Crescent Society के प्रमुख Pirhossein Kolivand ने जो आंकड़े जारी किए हैं, वो बहुत चिंताजनक हैं। इस हमले में केवल सैन्य ठिकाने ही नहीं, बल्कि हज़ारों घर, स्कूल और अस्पताल भी मलबे में बदल गए हैं।
हमलों में किन जगहों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा?
Pirhossein Kolivand की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे ईरान में नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। इसमें सबसे ज़्यादा असर रिहायशी इलाकों और आम लोगों के कारोबार पर पड़ा है। नीचे दी गई तालिका में नुकसान का पूरा ब्यौरा है:
| प्रभावित ठिकाने | संख्या |
|---|---|
| कुल नागरिक इकाइयां | 1,25,630 |
| आवासीय संपत्तियां (घर) | 1,00,000 |
| व्यावसायिक केंद्र (बिजनेस) | 23,500 |
| मेडिकल सुविधाएं (अस्पताल, लैब) | 339 |
| स्कूल | 857 |
| विश्वविद्यालय | 32 |
| रेड क्रिसेंट केंद्र | 20 |
| लॉजिस्टिकल साइट्स (ईंधन टैंक, हवाई अड्डे) | 15 |
क्या यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है?
IRCS के प्रमुख कोलीवंद ने इन हमलों को जिनेवा कन्वेंशन के तहत युद्ध अपराध बताया है। उन्होंने इंटरनेशनल रेड क्रॉस कमेटी (ICRC) की अध्यक्ष मिर्जाना स्पोलजारिक एगर को पत्र लिखकर इस पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि नागरिक और सैन्य ठिकानों के बीच फर्क करना ज़रूरी था, जिसे नज़रअंदाज़ किया गया।
कोलीवंद ने इस बात पर ज़ोर दिया कि रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट जैसी तटस्थ संस्थाओं को विशेष सुरक्षा मिलनी चाहिए। नियमों के मुताबिक, इन मानवीय केंद्रों या उनके वाहनों पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।





