इसराइल ने फ्रांस को बातचीत से निकाला, लेबनान के साथ अगले हफ्ते वाशिंगटन में होगी सीधी बैठक
इसराइल ने लेबनान के साथ होने वाली अपनी सीधी बातचीत से फ्रांस को पूरी तरह बाहर कर दिया है। यह बैठक अगले हफ्ते अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में होने वाली है। इसराइल का आरोप है कि फ्रांस अब भरोसेमंद नहीं रहा और उसका झुकाव दूसरे पक्षों की तरफ ज्यादा है। दोनों देशों के बीच बिगड़ते रिश्तों की वजह से यह कड़ा फैसला लिया गया है और अब इसमें केवल अमेरिका ही मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।
आखिर क्यों फ्रांस को इस चर्चा से दूर रखा गया
इसराइल का मानना है कि पिछले एक साल में फ्रांस ने ऐसे कई कदम उठाए हैं जिससे उसकी निष्पक्षता खत्म हो गई है। एक वरिष्ठ इसराइली अधिकारी के मुताबिक फ्रांस ने ईरान के खिलाफ इसराइली कार्रवाई को सीमित करने की कोशिश की और हिजबुल्लाह के खिलाफ भी कोई सख्त रुख नहीं दिखाया। इसके अलावा फ्रांस ने इसराइल के लिए सैन्य सामान ले जा रहे अमेरिकी विमानों को अपना रास्ता देने से मना कर दिया था। इन्हीं वजहों से इसराइल ने साफ कह दिया है कि फ्रांस अब एक ईमानदार मध्यस्थ नहीं रह गया है।
बातचीत का पूरा शेड्यूल और मुख्य लोग
लेबनान ने खुद इसराइल के साथ सीधी बातचीत की मांग की है ताकि युद्ध के बड़े खतरे को टाला जा सके। अमेरिका ने इस बातचीत के लिए शर्त रखी है कि हिजबुल्लाह के हथियारों को खत्म करने पर ठोस काम होना चाहिए। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले बातचीत के लिए तैयार नहीं थे लेकिन अब उन्होंने अपनी मंजूरी दे दी है। इस बैठक से जुड़ी कुछ मुख्य जानकारियां इस प्रकार हैं।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तारीख | अगले हफ्ते मंगलवार से शुरू |
| स्थान | अमेरिकी विदेश विभाग, वाशिंगटन |
| इसराइल का प्रतिनिधित्व | राजदूत Yechiel Leiter |
| लेबनान का प्रतिनिधित्व | राजदूत Nada Hamadeh |
| मुख्य मध्यस्थ | अमेरिकी राजदूत Michele Sison |
फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इसराइल का यह कदम स्वीकार करने योग्य नहीं है। फ्रांस अब इसराइल और यूरोपीय संघ के बीच होने वाले समझौतों पर दोबारा विचार कर सकता है। मार्च 2026 में ही इसराइल ने फ्रांस के साथ अपना रक्षा व्यापार पूरी तरह बंद कर दिया था जिससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है।




