ईरान की हरकतों से GCC देशों को खतरा, व्हाइट हाउस ने दी चेतावनी, तेल की कीमतों पर पड़ेगा असर
अमेरिका के व्हाइट हाउस ने ईरान की गतिविधियों को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के डायरेक्टर केविन हैसेट ने कहा कि ईरान का मिसाइल प्रोग्राम और उसकी क्षेत्रीय हरकतें GCC देशों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं। इससे न सिर्फ खाड़ी देशों बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेश और पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता पर बुरा असर पड़ सकता है।
Strait of Hormuz और तेल की कीमतों का क्या होगा हाल
केविन हैसेट ने जानकारी दी कि फिलहाल Strait of Hormuz अपनी सामान्य क्षमता के केवल 10 प्रतिशत पर काम कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो महीनों में हालात सुधरेंगे और जून से पहले अमेरिका और ईरान के बीच सुलह हो सकती है। अगर यह रास्ता पूरी तरह खुल जाता है, तो तेल की सप्लाई सामान्य होगी और एनर्जी की कीमतों में कमी आएगी, जिससे महंगाई का दबाव कम होगा।
शांति वार्ता में क्या हैं मुख्य विवाद
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही है, जिसमें अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति JD Vance ने टीम का नेतृत्व किया। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच शर्तों को लेकर बड़ा विवाद है। जहाँ अमेरिका ईरान से मिसाइल प्रोग्राम रोकने और यूरेनियम स्टॉक सौंपने की मांग कर रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी ‘रेड लाइन’ बता रहा है।
| पक्ष | मुख्य मांग और स्थिति |
|---|---|
| अमेरिका | मिसाइल प्रोग्राम बंद हो और यूरेनियम स्टॉक सौंपा जाए |
| ईरान | यूरेनियम संवर्धन और मिसाइल प्रोग्राम पर कोई समझौता नहीं |
| ईरान | Strait of Hormuz पर नियंत्रण और लेबनान में युद्धविराम |
| अमेरिका | ईरान गैर-राज्य अभिनेताओं को समर्थन देना बंद करे |
कुवैत और सऊदी अरब में हुए हमले
10 अप्रैल को कुवैत में महत्वपूर्ण सुविधाओं और नेशनल गार्ड बेस पर ड्रोन हमले हुए, जिसका आरोप ईरान और उसके समर्थकों पर लगाया गया है। उधर सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने भी तेल, पेट्रोकेमिकल और बिजली संयंत्रों में हुए भारी नुकसान की जानकारी दी है। हालांकि, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इन हमलों की जिम्मेदारी से इनकार किया है और इसका आरोप अमेरिका या इसराइल पर लगाया है।




