US-Iran Peace Talks: पाकिस्तान बना मध्यस्थ, जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की ‘हगलोमेसी’ पर उठाए सवाल
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आज 11 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में शुरू हुई है। इस बैठक में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जिस पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री की विदेश नीति को ‘हगलोमेसी’ बताते हुए सरकार की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जयराम रमेश ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को ‘X’ पर एक पोस्ट लिखा। उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग करने में नाकाम रही। उन्होंने इसकी तुलना पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार से की, जिसने 2008 के मुंबई हमलों के बाद पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया था। रमेश ने सवाल किया कि ‘Howdy Modi’ और ‘Namaste Trump’ जैसे आयोजनों के बावजूद अमेरिका ने पाकिस्तान को यह अहम भूमिका कैसे दे दी।
शांति वार्ता में शामिल मुख्य प्रतिनिधि और विवरण
इस्लामाबाद में हो रही इस बैठक में अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बड़े अधिकारी शामिल हैं। सुरक्षा के लिए शहर के रेड ज़ोन को पूरी तरह सील कर दिया गया है और ईरानी डेलीगेशन के आने पर उन्हें फाइटर जेट्स और AWACS से सुरक्षा दी गई।
| देश | प्रमुख प्रतिनिधि |
|---|---|
| अमेरिका | जे.डी. वेंस (उपराष्ट्रपति), स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर |
| ईरान | मोहम्मद बागेर गालिबाफ, अब्बास अराघची और अली अकबर अहमदियन |
| पाकिस्तान | शहबाज शरीफ, इशाक डार, सैयद मोहसिन रज़ा नकवी और जनरल आसिम मुनीर |
पहलगाम हमला और वार्ता का मुख्य मुद्दा क्या है?
यह पूरी बहस 2025 के पहलगाम हमले से जुड़ी है, जिसकी जिम्मेदारी पहले TRF ने ली थी लेकिन बाद में वे मुकर गए। पाकिस्तान ने इस हमले की जांच में मदद की पेशकश की है, जिसे अमेरिका ने भी समर्थन दिया है। वर्तमान शांति वार्ता एक नाजुक युद्धविराम के बाद हो रही है। इसमें ईरान का 10-सूत्रीय प्लान और अमेरिका का 15-सूत्रीय प्रस्ताव चर्चा का मुख्य विषय है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप ने workable बताया है।




