Kuwait पर ईरान का हमला, सऊदी अरब ने जताया कड़ा विरोध, कहा यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है
कुवैत के अहम ठिकानों पर ईरान और उसके समर्थकों ने हमला किया है. इस घटना के बाद सऊदी अरब ने कड़ी नाराजगी जताई है. सऊदी विदेश मंत्रालय ने इसे कुवैत की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय नियमों का बड़ा उल्लंघन बताया है. इस हमले ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है.
कुवैत और सऊदी अरब पर क्या हुआ हमला?
9 अप्रैल 2026 की शाम को कुवैत के कुछ जरूरी ठिकानों को निशाना बनाया गया. इसके तुरंत बाद 9 और 10 अप्रैल को ईरान के IRGC ने सऊदी अरब की ऊर्जा सुविधाओं पर भी हमला किया. सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को भी नुकसान पहुँचा है. इन हमलों की वजह से करीब 6 लाख बैरल तेल का उत्पादन प्रभावित हुआ है.
देशों की आधिकारिक प्रतिक्रिया क्या रही?
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने 11 अप्रैल को बयान जारी कर इन हमलों की कड़ी निंदा की. कुवैत ने भी इसे अपनी हवाई सीमा और संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया है. कुवैत ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत अपना बचाव करने का पूरा हक जताया है. उन्होंने मांग की है कि ईरान और उसके साथी तुरंत इन हमलों को रोकें.
तनाव और आने वाली बातचीत का क्या अपडेट है?
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में बातचीत होनी है, जो शनिवार (12 अप्रैल) को तय है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की प्रभावशीलता पर संदेह जताया है. वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन का कहना है कि युद्धविराम कमजोरी की निशानी नहीं है. इस बीच अमेरिका के एक बड़े काउंटर-टेररिज्म अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| हमले की तारीख | 9 और 10 अप्रैल 2026 |
| मुख्य टारगेट | कुवैत के अहम ठिकाने और सऊदी ऊर्जा केंद्र |
| आरोपी पक्ष | ईरान, IRGC और उनके समर्थक समूह |
| सऊदी का नुकसान | ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन क्षतिग्रस्त |
| तेल उत्पादन प्रभाव | 6 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी |
| कानूनी संदर्भ | UN चार्टर और सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2817 |
| अगली बैठक | 12 अप्रैल, इस्लामाबाद (अमेरिका-ईरान) |




