US और Iran के बीच पाकिस्तान में बातचीत शुरू, इस्लामाबाद में जुटे दोनों देशों के बड़े नेता, शांति की कोशिश.
अमेरिका और ईरान के बीच सालों बाद सीधी बातचीत शुरू हुई है. यह महत्वपूर्ण मीटिंग पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई. दोनों देशों के बीच पिछले छह हफ्ते से चल रहे तनाव और संघर्ष को खत्म कर स्थायी शांति लाने के लिए यह कदम उठाया गया है.
बातचीत में कौन शामिल है और क्या है मकसद?
इस हाई-लेवल मीटिंग का मुख्य उद्देश्य 8 अप्रैल से लागू हुए दो हफ्ते के युद्धविराम को एक स्थायी समझौते में बदलना है, जो 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है. पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. मीटिंग की सुरक्षा के लिए इस्लामाबाद में कई रास्ते बंद रखे गए थे.
| देश | मुख्य प्रतिनिधि | अन्य सदस्य |
|---|---|---|
| अमेरिका | उपराष्ट्रपति JD Vance | Steve Witkoff, Jared Kushner |
| ईरान | संसद स्पीकर Mohammad Bagher Qalibaf | विदेश मंत्री Abbas Araghchi |
| पाकिस्तान | PM Shehbaz Sharif | विदेश मंत्री Mohammad Ishaq Dar |
मीटिंग में किन बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई?
इस बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा की गई. साथ ही Strait of Hormuz को पूरी तरह खोलने की मांग भी रखी गई ताकि वैश्विक व्यापार प्रभावित न हो. अमेरिका ने अपनी मांगों के लिए 15 पॉइंट का प्रस्ताव रखा है, जबकि ईरान ने 10 पॉइंट का शांति प्लान पेश किया है.
- ईरान ने लेबनान में इजरायली हमलों को कम करने की शर्त रखी थी.
- अमेरिका ने ईरान की मिसाइल गतिविधियों को वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा बताया.
- डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरानी अधिकारियों के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है.
दोनों देशों के बीच किन बातों पर विवाद रहा?
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने साफ कहा कि वे अमेरिका पर गहरा अविश्वास करते हैं और आरोप लगाया कि अमेरिका ने पुराने शांति प्लान का उल्लंघन किया है. वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बातचीत को लेकर उम्मीद जताई लेकिन ईरान को चेतावनी दी कि वह अमेरिका को धोखा देने की कोशिश न करे.
एक बड़ा विवाद जमी हुई संपत्तियों (frozen assets) को लेकर सामने आया. ईरान के एक सूत्र ने दावा किया कि अमेरिका संपत्तियां छोड़ने को राजी हो गया है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात से पूरी तरह इनकार कर दिया है.




