अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में सीधी बातचीत शुरू, परमाणु हथियारों और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर फंसा मामला
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सीधी बातचीत शुरू हुई है। दोनों देशों के प्रतिनिधि शनिवार को आमने-सामने बैठे और चर्चा की। यह एक बड़ा बदलाव है क्योंकि पहले दोनों पक्ष किसी तीसरे देश के जरिए संदेश भेजते थे। अब दोनों टीमें सीधे तौर पर शांति समझौते की कोशिश कर रही हैं।
बातचीत में शामिल मुख्य प्रतिनिधि
इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों देशों की तरफ से बड़े अधिकारियों और सलाहकारों की टीम पहुंची है। पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
| पक्ष | मुख्य प्रतिनिधि/सदस्य |
|---|---|
| अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल | JD Vance (नेता), Steve Witkoff, Jared Kushner, Dr. Andrew Baker, Michael Vance |
| ईरानी प्रतिनिधिमंडल | Mohammad Bagher Ghalibaf (नेता), Abbas Araghchi (विदेश मंत्री) और 70 से ज्यादा सदस्य |
| मध्यस्थ (पाकिस्तान) | प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और सेना प्रमुख Gen. Asim Munir |
दोनों देशों की मुख्य मांगें और विवाद के मुद्दे
शांति वार्ता के बीच कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर दोनों देशों की राय बिल्कुल अलग है। इन बातों पर सहमति बनना अभी बाकी है।
| मुद्दा | अमेरिका की मांग | ईरान की मांग |
|---|---|---|
| परमाणु कार्यक्रम | ईरान परमाणु हथियार न बनाए | परमाणु कार्यक्रम की गारंटी मिले |
| हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य | रास्ते को पूरी तरह खोला जाए | इस रास्ते पर नियंत्रण का अधिकार |
| संपत्ति और युद्ध | सुरक्षा शर्तों का पालन हो | 6 अरब डॉलर की संपत्ति वापस मिले और लेबनान में युद्ध रुके |
नेताओं और विशेषज्ञों का क्या कहना है?
पूर्व अमेरिकी अधिकारी Heino Klinck ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं के बीच लंबी बातचीत होना एक सकारात्मक संकेत है। वहीं पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और माहौल काफी सहज है।
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि उनके लिए डील से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि अमेरिका पहले ही जीत चुका है, लेकिन उनका मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका पर भरोसा न होने की बात कही है।
फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में तनाव कम करना और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित करना बहुत जरूरी है।




