अमेरिका और ईरान की बातचीत टूटी, इस्लामाबाद में 21 घंटे की मीटिंग के बाद भी नहीं बनी बात, युद्ध का खतरा बढ़ा
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने की कोशिशें नाकाम रहीं. पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चली लंबी बातचीत के बाद भी दोनों देश किसी समझौते पर नहीं पहुँच पाए. इस वजह से अब 22 अप्रैल को खत्म होने वाले युद्धविराम पर संकट मंडराने लगा है.
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बातचीत टूटने की मुख्य वजह क्या रही
अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की अपनी जिद छोड़ने को तैयार नहीं था. अमेरिका ने अपना आखिरी और सबसे अच्छा ऑफर दिया, लेकिन बात नहीं बनी, जिसके बाद पूरी अमेरिकी टीम पाकिस्तान से वापस लौट आई. दूसरी तरफ ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागर कालिबाफ ने कहा कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा थीं और दोनों देशों की राय में बड़ा अंतर था.
युद्धविराम और दुनिया का क्या कहना है
7 अप्रैल को दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ था, जो अब 22 अप्रैल को खत्म हो जाएगा. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार ने दोनों पक्षों से इस युद्धविराम को बनाए रखने की अपील की है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी शांति के लिए बीच-बचाव की पेशकश की है, जबकि ब्रिटेन की सरकार ने इस नतीजे पर निराशा जताई है.
समझौते में कौन से बड़े मुद्दे थे
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| बातचीत की तारीख | 11 और 12 अप्रैल 2026 |
| स्थान | इस्लामाबाद, पाकिस्तान |
| अमेरिकी टीम का नेतृत्व | JD Vance (उपराष्ट्रपति) |
| ईरानी टीम का नेतृत्व | मोहम्मद बागर कालिबाफ |
| मुख्य विवाद | परमाणु हथियार और होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण |
| युद्धविराम की अंतिम तारीख | 22 अप्रैल 2026 |
| मध्यस्थ देश | पाकिस्तान और चीन |




