Islamabad Summit: ईरान और अमेरिका की बातचीत रही नाकाम, अपनी शर्तों पर अड़ा रहा ईरान
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक बड़ी मीटिंग हुई थी. इस समिट का मकसद दोनों देशों के बीच बीचस्थता करना था, लेकिन यह बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई. ईरान ने अपनी शर्तों पर अड़िग रहते हुए इस नतीजे को अपनी एक खामोश जीत बताया है.
ईरान ने बातचीत के लिए क्या शर्तें रखी थीं?
ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने इस्लामाबाद पहुँचने पर साफ कर दिया कि जब तक कुछ शर्तें पूरी नहीं होतीं, बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी. उन्होंने लेबनान में युद्धविराम और ईरान की ब्लॉक की गई संपत्तियों को वापस करने की मांग की थी. Ghalibaf ने कहा कि अमेरिका ने पहले भी कई वादे तोड़े हैं, इसलिए अब उन पर भरोसा करना मुश्किल है.
इस्लामाबाद समिट में असल में क्या हुआ?
यह मीटिंग दो दिनों के लिए तय की गई थी, लेकिन आपसी सहमति न बनने के कारण यह सिर्फ एक दिन में ही खत्म हो गई. पाकिस्तान ने मध्यस्थता करने की कोशिश की और इस बैठक में सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्री भी शामिल हुए थे. लेकिन अंत में अमेरिका और ईरान के बीच भविष्य की बातचीत के लिए कोई ठोस रोडमैप तैयार नहीं हो सका.
ईरान ने इसे अपनी जीत क्यों माना?
ईरान के सुप्रीम लीडर ने मार्च के महीने में ही कह दिया था कि दुश्मन अपने मकसद में नाकाम रहा है. IRNA की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटा और अमेरिका को अपनी बात मनवाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सका. इसी वजह से इस विफलता को ईरान ने अपनी खामोश जीत के तौर पर देखा है.




